मड़िहान। तहसील क्षेत्र के कलवारी गांव स्थित गुरुदेवनगर आश्रम के कब्जे वाली चारागाह के नाम से विवादित जमीन की दफन फाइलों का राज ग्रामीणों की शिकायत पर खुलने लगा है। इसी तरह मामला गरम होने पर तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश निर्देश पर सन 2008 में मड़िहान तहसील में नियुक्त उप जिला मजिस्ट्रेट कैलाश नाथ सिंह के सहयोग से नायब तहसीलदार ने जांच के बाद हेराफेरी करने वाले सेवामुक्त अधिकारियों समेत बाबा के खिलाफ चुनार कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन मामला दब गया। उस समय ग्रामप्रधान भी चुप्पी साध लिए थे। कहा जा रहा हैं कि जिस समय तहसील के अभिलेखों में हेराफेरी की गई थी। उस समय उपजिलाधिकारी एके श्रीवास्तव व नायब तहसीलदार जिलाधारी लाल श्रीवास्तव व बाबा विवेकानंद दोहथा वाराणसी की मिलीभगत का आरोप माना जाता है। चर्चा तो यह भी थी कि मुकदमा दर्ज होने के समय तीनो धरती छोड़ चुके थे। चारागाह की जमीन पर अनाधिकार कब्जे को लेकर ग्रामीण व आश्रम के बाबा पक्ष में न्याय को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। शनिवार की दोपहर विवाद बढ़ने पर ग्रामीणों के आक्रोश का सामना पुलिस - प्रशासन को करना पड़ा। लगभग तीन सौ ग्रामीणों ने पूरे प्रशासनिक टीम का घेराव कर लिया था। हालांकि कि दोनो पक्षों को एक बार फिर तहसील मुख्यालय वार्ता के लिए बुलाया गया है।