विंध्याचल। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को मिर्जापुर प्रवास के दूसरे दिन शुक्रवार को महुआरी कला स्थित देवरहा हंस आश्रम स्थित हनुमान मंदिर में 76 मन बेसन के लड्डू का भोग लगाया। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूका-अर्चना की। इसके बाद हनुमान मंदिर के ठीक सामने कल्पवृक्ष का पौधा लगाया।
मोहन भागवत ने पूजा-अर्चना के बाद भक्त निवास में जलपान किया। इसके बाद मां विंध्यवासिनी के दरबार पहुंचे। पुरानी वीआईपी मार्ग से पहुंचे संघ प्रमुख के लिए सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत सुबह साढ़े आठ बजे से ही मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर को पूरी तरीके से खाली करा लिया गया था। आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-पूजन रोक दिया गया था। मंदिर पहुंचने पर वे गणेश द्वार से होते हुए गर्भगृह में पहुंचे। संघ प्रमुख ने विधि विधान से मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया। दर्शन पूजन कर बाहर निकले मोहन भागवत का मां विंध्यवासिनी का चित्र एवं पुष्पगुच्छ देकर जिलाधिकारी दिव्या मित्तल एवं पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने स्वागत किया। मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं का दर्शन-पूजन कर उन्होंने मां के फरहरा (पताका) का दर्शन भी किया। उन्होंने त्रिकोण परिक्रमा पथ में विराजमान काली खोह में महाकाली मंदिर के गर्भगृह में पूजन किया। काली खोह के पश्चात मां अष्टभुजा देवी का दर्शन-पूजन कर वाराणसी के लिए रवाना हो गए। दर्शन-पूजन पुरोहित नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने कराया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
इससे पहले ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा के विंध्याचल आश्रम में बृहस्पतिवार शाम को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत का आगमन हुआ। शाम को वे बाबा का दर्शन करने और आशीर्वाद लेने उनके कक्ष में पहुंचे। बाबा ने उनको अखंड भारत के निर्माण और सनातन धर्म के विश्वव्यापी होने के लिए आशीर्वाद दिया। उनको निर्देशित किया कि इसके लिए महावीर हनुमान जी को 76 मन बेसन के लड्डुओं से पूजा अनुष्ठान करवाएं। इसी कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को अनुष्ठान कराकर यह संकल्प लिया कि कैलाश मानसरोवर और भारत की 40 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि जो चीन के कब्जे में है, वह भारत के पास जल्द ही वापस आ जाए। बाबा ने संकेत किया और स्पष्ट भी किया कि चीन और पाक का पतन होगा और कैलाश मानसरोवर व भारत की समस्त देवभूमि देश में शीघ्र वापस आएगी। बाबा का यह महाप्रसाद प्रधान मंत्री, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को वितरित किया जाएगा।