श्री राघवेंद्र रामलीला कमेटी के तत्वावधान में अति प्राचीन रामलीला का मंचन 18 सितंबर से शुरू होगा। इस 21 दिवसीय रामलीला की तैयारी तेज कर दी गई है। रामलीला भवन की रंगाई-पुताई के साथ ही वस्त्र, शस्त्र, आभूषण आदि की साफ-सफाई और नए मुकुट आदि तैयार किए जा रहे हैं।
नगर की 186 वर्ष पुरानी रामलीला देखने के लिए स्थानीय लोगों के अलावा दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग आते हैं। वर्ष 2004 में चुनार के रामबाग में प्रख्यात श्रीराम कथा वाचक संत मोरारी बापू की कथा के दौरान रामलीला कमेटी की तरफ से मंच पर प्रसिद्ध धनुष यज्ञ लीला का मंचन किया गया था। जो उन्हें काफी पसंद आया था। उन्होंनेे चुनार की धनुष यज्ञ लीला के मंचन का बखान मारीशस में रामकथा के दौरान किया था।
रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन से शुरू होता है और सनक सनंदन की लीला के साथ इसका समापन होता है। कुल 21 दिनों तक चलने वाली रामलीला में रावण वध (विजयादशमी) उस्मानपुर में तथा राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न समेत चारों भाइयों का मिलन (भरत मिलाप) टेकौर स्थित भरत मिलाप मंच पर मंचन होता है। अन्य 19 दिनों की रामलीला का मंचन चुनार स्थित मंच पर होता है।
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा ने बताया कि दो वर्ष रामलीला का मंचन कोविड महामारी के चलते नहीं हुआ। इस वर्ष प्रभु श्रीराम की लीला का मंचन भव्य रूप में किया जाएगा। रामलीला कमेटी के डायरेक्टर अविनाश अग्रवाल ने बताया कि पिता के समय से ही जुड़कर वे प्रभु श्रीराम की लीला के मंचन में पात्रों के अभिनय पाठ को पूर्ण कराने का दायित्व निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रामलीला के मंचन से जुड़े पात्रों ने पूर्वाभ्यास शुरू कर दिया है। रामलीला के सभी पात्र स्थानीय हैं और व्यापार से जुड़े हुए हैं।