जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध बीपीएड कॉलेजों की सीटों को भरने के लिए समिति निर्णय लेगी। सीटें नहीं भरने के कारण जहां विश्वविद्यालय को मिलने वाले राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं, कॉलेजों को लाखों रुपये की चपत लग रही है। पहले काउंसिलिंग के बाद भी 451 सीटें खाली रह गई हैं। गाजीपुर और जौनपुर में बीपीएड के कुल 8 महाविद्यालयों का संचालन हो रहा है। इसमें गाजीपुर में 7 और जौनपुर में एक महाविद्यालय शामिल है। इन महाविद्यालयों में बीपीएड की 585 सीटें हैं। इस सीटों पर प्रवेश के लिए 275 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इन सीटों को भरने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एकलव्य स्टेडियम में 11 और 12 अगस्त को परिसर में दक्षता परीक्षा कराया था। इसमें 134 अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग कराई थी। कुल 134 अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग कराई। बीपीएड में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों में से 50 फीसदी ने ही काउंसिलिंग कराई। 141 अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग छोड़ दिया। पहली काउंसिलिंग के बाद करीब 451 सीटें खाली रह गई है। काउंसिलिंग में अभ्यर्थियों के नहीं आने के कारण दो दिन तक चलने वाली काउंसिलिंग प्रक्रिया एक दिन में खत्म हो गई। दूसरे दिन केवल औपचारिकता पूरी की गई। पहली काउंसिलिंग के बाद खाली बची सीटों को भरने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन खाका तैयार कर रहा है। बीपीएड प्रवेश समिति के समन्वयक डॉ. शेखर सिंह ने बताया कि समिति की बैठक शीघ्र बुलाकर खाली पड़ी को भरने के लिए निर्णय लिया जाएगा। परीक्षा नियंत्रक के यहां से पत्र जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। कॉलेज संचालकों का कहना है कि छात्र नहीं मिलने के कारण कॉलेज बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। हर साल लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।