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दूसरे से खुद को कमतर नहीं आंकना चाहिए : डाॅ. राहुल सिंह

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काम करने की सबकी अलग-अलग क्षमता है। जिसकी जितनी क्षमता रहेगी वह उतना ही काम कर सकता है। अपनी क्षमता का बेहतर ढंग से प्रदर्शन करना चाहिए। अपना 100 प्रतिशत देने का प्रयास करना चाहिए। इससे कार्य बेहतर होगा। दूसरे से खुद को कमतर नहीं आंकना चाहिए। यहा कहना है नैदानिक मनोवैज्ञानिक डाॅ. राहुल सिंह का। वह बुधवार को अमर उजाला की ओर से नगर के एसएन पब्लिक स्कूल में आयोजित तनाव मुक्त परीक्षा कार्यक्रम में विद्यार्थियों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पढ़ाई करना कठिन काम है। पढ़ाई के लिए मन लगाना पड़ता है। हाईस्कूल व इंटर परीक्षा को लेकर घबराने की जरुरत नहीं है। परीक्षा के समय अगर धड़कन बढ़ता है, नींद नहीं आती, पढ़ाई करने का मन नहीं करता, सिर दर्द, उल्टी, बेहोशी आने लगती है तो ये एंजाइटी (चिंता अवसाद) के लक्षण हैं। कहा कि डिप्रेशन कोई फैंसी बीमारी नहीं है बल्कि यह भी हार्ट अटैक अन्य बड़ी बीमारी की तरह मेडिकल इमरजेंसी है। यह मुड डिस ऑर्डर की बीमारी है। आत्महत्या का ख्याल आना, मन में निराशा का भाव, दुनिया बेकार लगना आदि डिप्रेशन के लक्षण हैं। दूसरों की अपेक्षा का बोझ अपने ऊपर नहीं हावी होने देना चाहिए। यही डिप्रेशन से बचाव का उपाय है। जब भी डिप्रेशन महसूस हो शरीर को ढीला करके आंख बंद कर गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे एकाग्रता बढ़ती। कहा कि परीक्षा के दाैरान रोजाना व्यायाम करना चाहिए। भरपूर नींद लेनी चाहिए। 45 मिनट पढ़ने के बाद ब्रेक लेना चाहिए। इस दौरान सर्वेश सिंह, आंशिका त्रिपाठी, तन्मय उपाध्याय, शगुन दुबे आदि ने सवाल पूछे। इस माैके पर प्रबंधक हर्षित सिंह, प्रधानाचार्य रामआसरे कैथवार, मोनिका, नितेश शर्मा, प्रिया सिंह, अंकित तिवारी माैजूद रहे।
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