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अपने परिवार का सहारा बन उभरी निशा

Wed, 09 Mar 2016 01:17 AM IST
ब्यूरो/ अमरउजाला, मिर्जापुर
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निशा - फोटो : mirzapur
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निशा के पिता गुजरे तो परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन निशा ने संघर्ष और आत्मविश्वास के दम पर मुकदमा लड़कर न सिर्फ पिता के स्थान पर नौकरी प्राप्त की बल्कि निशा ने अपने सपनों का बलिदान कर अपनी शादी न करके अपनी छोटी दो बहनों का लालन पालन करने के बाद उनकी शादी कर एक मिसाल कायम किया।
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माता और पिता के नहीं रहने पर निशा अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर कहती हैं कि अच्छा लड़का मिलेगा तो परिवार बसाएंगे। 


बता दें कि निशा के पिता स्व. हरि प्रसाद श्रीवास्तव जो चकबंदी विभाग में कार्यरत थे उनकी मौत अचानक 1996 में हो गई थी, इसके बाद मृतक आश्रित के पद पर निशा ने अदालती लड़ाई लड़कर सन् 2000 में अपने पिता के स्थान पर नौकरी प्राप्त की।


नौकरी मिलने से निशा के परिवार की बिगड़ी आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार होने लगा। मृतक आश्रित पद पर चकबंदी विभाग वाराणसी में चतुर्थ श्रेणी पद पर कार्य करते हुए निशा ने छोटी बहन आशा और विभा का विवाह किया। आठवीं पास कर चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी कर रही निशा का कहना है कि पढ़ने की हसरत बहुत थी, लेकिन विपरीत हालात व गरीबी के चलते पढ़ाई नहीं कर सकी।
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निशा का संकल्प था कि जब तक अपनी छोटी दोनों बहनों की शादी नहीं कर लूूंगी तब तक अपनी शादी नहीं करूंगी। निशा की मां धर्मराजी का एक वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। निशा ने बताया कि जब उसकी मां जिंदा थी तब कहा करतीं थी कि मेरी बेटी निशा बुरे वक्त में बेटा बन कर सामने आई है।


निशा अपनी छोटी बहनों की जिम्मेदारी पूरी करने के कारण अपनी शादी पर ध्यान नहीं दिया। मां का कहना था अगर मेरे कोई बेटा होता तो वह शादी करके अलग हो जाता लेकिन मेरी बेटी ही बेटे के समान है। मां के इस संदेश का अनुसरण करते हुए बेटी निशा अब अपने बहनों की शादी करके जिम्मेदारियों से मुक्त हो चुकी है।
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निशा का कहना है कि अब मां और पिता जी के आशीर्वाद से बहनों की शादी कर चुकी हूं। 
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