लालगंज। जैकर स्थित परमहंस आश्रम में बृहस्पतिवार को भावानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए जीवन सुधार के सूत्र दिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पुरानी वस्तुओं को हटाकर ही स्थान बनता है। वैसे ही जब तक हम पुराने गलत विचारों और आदतों को नहीं छोड़ेंगे, तब तक जीवन में नए विचार, नया विकास और नया ज्ञान नहीं आ सकता। उन्होंने कहा कि लालच एक पुरानी और घातक आदत है। इसे छोड़ने से समाज के आपसी झगड़े मिटते हैं और नए संस्कारों का जन्म होता है। इससे धर्म के प्रति लगाव और भक्ति बढ़ती है। जिससे समाज में एक नई ऊर्जा और आपसी विश्वास का संचार होता है। स्वामी जी ने महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उन्होंने सप्त ऋषियों के ज्ञान से प्रेरित होकर अपनी पुरानी आदतों का त्याग किया और एक महाज्ञानी के रूप में प्रतिष्ठित हुए। कहा कि भोजन का महत्व केवल पेट भरने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा असर हमारे जींस और मानसिक विकास पर पड़ता है। गलत खाद्य पदार्थों के सेवन से नकारात्मक प्रवृत्तियां जन्म लेती हैं जो परिवार और समाज में विवाद का कारण बनती हैं। इसलिए जीवन में सुख-शांति के लिए रसोई और खान-पान की शुद्धता अनिवार्य है। इस अवसर पर गणेश यादव ,अरविंद यादव ,भोला गुप्ता आदि उपस्थित रहे।