मिर्जापुर। वैश्विक महामारी व लॉकडाउन में उद्यमियो को घाटे से उबारने के लिए माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राईजेज (एमएसएमई) योजना काम नहीं आ रही है। इस संकट से उबारने के लिए सरकार ने भले ही राहत पैकेज के नाम पर तीन लाख करोड़ का सौ फीसदी गारंटी देकर राहत पहुंचाए जाने का दावा कर रहा है। लेकिन अधिकांश उद्यमियों तक 20 प्रतिशत का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। कहीं पर बैंक गाइड लाइन न आने का हवाला देकर उद्यमियों को टाल रहा है तो कहीं पर बैंक वालो की ओर से उद्यमियों से पांच साल का रिकार्ड मांगकर उद्यमियो को अनावश्यक रुप से परेशान किया जा रहा है। जबकि जिले में बेरोजगार को आत्म निर्भर बनाने के लिए उद्योग विभाग की ओर से पीएमईपी और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अलावा ओडीओपी योजना चलाया जा रहा है। इसी तरह से खादी ग्रामोद्योग विभाग की ओर से पीएमईजीपी व मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग योजना संचालित की जा रही है। इसमें बेरोजगारो का चयन कर बगैर ब्याज के ऋण प्रदान किए जाते हैं। लॉकडाउन में संकट से उबारने के नाम पर मिलने वाले राहत के बारे में उद्यमियो में शामिल महिमा कार्पेट के अवधेश पांडेय, मशाला उद्योग के राकेश व मैन्यूफैक्चरिंग ऑफ ट्रैक्टर ट्राली के प्रोप्राईटर नौशाद समेत अन्य उद्यमियों से पूछताछ की गई तो लोगो ने एमएसएमई योजना के इस तरह की कोई सहायता मिलने से इनकार किया। मजे की बात तो यह है कि बैंको की ओर से भी इस तरह की योजनाओ के बारे मे उद्यमियो को कोई जानकारी भी नहीं दी जा रही है। जिले मे दो सौ विभिन्न बैंक ब्रांचो में 5 से 6 उद्यमियों को इस योजना का लाभ प्रदान किया गया है। 29 फरवरी तक जिनका खाता सही चल रहा है। खाता एनपीए नहीं हुआ है ऐसे उद्यमियों को एमएसएमई योजना के तहत प्राथमिकता के साथ 20 प्रतिशत का लाभ प्रदान किया जा रहा है।- कुमार अजय, अग्रणी जिला प्रबंधक।