पड़री। क्षेत्र में पशुओं में संक्रामक बीमारी का प्रकोप बढ़ गया है। दो दिन के अंदर संक्रामक बीमारी की चपेट में आने से विभिन्न गांवों में एक दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत हो गई। इससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।
पड़री स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय पर एक डॉक्टर, कंपाउंडर, पशुधन प्रसार अधिकारी के अलावा दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित पांच पद हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र एक चतुर्थ श्रेणी की ही तैनाती है। पशु धन प्रसार अधिकारी का पद रिक्त है। जंगल महाल सतेशगढ़ के डाॅ. अजय कुमार दुबे तथा चुनार पशु अस्पताल के कंपाउंडर अतुल शुक्ला को यहां का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। पशुपालकों का आरोप है कि डाॅक्टर और कंपाउंडर अस्पताल में कभी-कभार ही आते हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण खुरपका, मुंहपका का टीकाकरण नहीं हो पा रहा है। संक्रामक बीमारी की चपेट में आने से दो दिन के अंदर टेढ़ा गांव निवासी पशुपालक सुनील सिंह की दो बछिया, एक गाय, शिवप्रताप सिंह के दो बछवा, गोपाल सिंह की तीन गाय, दो बछिया, बंशीधर सिंह की एक गाय, गुरखूली के शिवशंकर की एक गाय सहित अन्य गांवों में मवेशियों की मौत हो गई। पशुपालकों का कहना है कि पशु अस्पताल में डॉक्टर, कंपाउंडर आदि की तैनाती नहीं होने से पशुओं का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है और संक्रामक बीमारी की चपेट में आने से पशुओं की मौत हो जा रही है। पड़री के प्रधान रामदेव सरोज, टोंगा के प्रधान व्यासजी बिंद, वेलवन के प्रधान प्रिया दुबे, कनौरा के प्रधान राकेश यादव, सरिया के प्रधान महेश यादव आदि ने संक्रामक बीमारियों से पशुओं की हो रही मौत पर चिंता जताते हुए टीकाकरण कराने की मांग किया है। इस संबंध में डाॅ. अजय कुमार दुबे का कहना है कि वे 20 दिन से छुट्टी पर थे। संक्रामक बीमारी की रोकथाम के लिए क्षेत्र में पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है।