गुड़हल, गुलाब और कमल के पुष्पों से किया गया मां का भव्य शृंगार का दर्शन पाकर श्रद्धालु भावविह्वल हो उठे।
शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन विंध्याचल मंदिर में देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुुओं ने मत्था टेक कर मंगलकामना की। घंटा-घड़ियाल, शंख और माता के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो रहा था। विंध्यधाम की तरफ जाने वाली सभी गलियां आस्थावानों से पटी रहीं। गंगा घाटों पर स्नान करने के लिए स्नानार्थियों की भारी भीड़ जुटी रही। गंगा में डुबकी लगाने के बाद माला-फूल, नारियल-चुनरी एवं प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचे भक्तों ने बड़े ही श्रद्धा भाव से मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन किया। गलियों में लगी कतार में खड़े श्रद्धालु मां की एक झलक पाने के लिए लालायित दिखाई दिए। जयकारा लगाते, हाथ में प्रसाद आदि लिए नंगे पांव मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। मां की भव्य आरती के समय कपाट बंद होते ही श्रद्धालुु जहां खड़े थे, वहीं पर बैठ कर मां के कपाट खुलने का इंतजार करते नजर आए। मां का दर्शन पूजन करने के बाद आस्थावानों ने मंदिर में विराजमान सभी देवी-देवताओं के धाम में जाकर विधिवत दर्शन-पूजन किया। मंदिर के छत पर जहां साधक पूजन-अनुष्ठान में मशगूल दिखे, वहीं शहनाई की धुन पर मुंडन संस्कार होते रहे। विंध्य की गलियों में सजी प्रसाद की दूकानों की बिजली की रोशनी से की गई सजावट देखते ही बन रही थी। दुकानों पर जुटी श्रद्धालुुओं की भीड़ देख दूकानदार भी गदगद रहे। विंध्य दरबार में मत्था टेकने के बाद भक्त नंगे पांव त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने।