मिर्जापुर। खेतो और सिवानो में टिड्डियों हो रहे हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे। क्षेत्र में प्रतिदिन इनके झुंड को लेकर किसान सकते में हो जा रहे। ऐसे में किसानों को टिड्डियों का झुंड दिखा तो वह अपने खेतों की रखवाली के लिए फौरन खेतों की ओर रवाना हो रहे हैं। टिड्डियां गन्ने की फसल के साथ ही सब्जियों की खेती चंद मिनटो में चट कर रही है। जबकि इनसे बाग और बगीचो को भी खतरा बना हुआ है। कछवां क्षेत्र में शुक्रवार को लाखो की संख्या में टिड्डो को देखकर किसानों के होश उड़ गए है। कई किसानों के धान की नर्सरी की पत्तियां चंद मिनटो में चट हो गईं। करसड़ा, रामापुर, सरावा, बाडापुर में कईयों किसानों की सब्जी की खेती व धान बर्बाद हो गई। टिड्डी दल जिस पेड़ पर बैठता उसकी डालियां टूट कर गिरने लगतीं। किसान टिड्डियों को भगाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं। कहीं ताली बजाकर तो कहीं पर थाली बजाकर उन्हे भगाने की कोशिश कर रहे। इतना ही नहीं कहीं-कहीं किसान रातभर जाग कर खेतो में आग जला कर धुआं कर रहे ताकि यह फसलों पर हमला न करें। हालांकि उनका किया गया सह प्रयासा नाकाफी हो रहा। बताते चलें कि एक दिन पूर्व गुरुवार को सिटी विकास खंड के देवरी ग्राम पंचायत के भवनकेपुरा समेत बीरशाहपुर व पड़री के गंगा तटवर्ती इलाको मे रसौरा, अकसौली, गडइया, रानी चौकिया, भगेसर,धरमदेवां, छटहां, रामनगर आदि में इनका प्रकोप दिखा। इसी तरह पटेहरा विकास खंड के बहुती, गुलालपुर, परमापुर, पटेहरा, दीपनगर, ककरद, रैकल, पीयूरी समेत अन्य गांवो में टिड्डियों की मौजूदगी रही। बरसात के मौसम में टिड्डियो का प्रकोप कम हो जाता है। पंख भीगने से वे हवा में उड़ नहीं पाते खेतो और सिवानों में बैठने पर वे बगुलो के ग्रास बन जाते हैं।- अशोक कुमार उपाध्याय, उप कृषि निदेशक मिर्जापुर।