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समूहो को हैंडओवर के बावजूद सामुदायिक शौचालयों में लटक रहा ताला

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मिर्जापुर। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से अधिकांश ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये से बने सामुदायिक शौचालय ग्रामीणों के किसी काम नहीं आ रहे हैं। समूहो को हैंडओवर किए जाने के बावजूद अधिकांश में ताला लटक रहा है। इसके पीछे आधे अधूरे शौचालय बताए जा रहे हैं। जमीन के अभाव में कुछ ग्राम पंचायत को छोड़कर जिले के शेष बारहो विकास खंड के ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया है। बताया तो यहां तक जाता है कि शौचालय बाहर से भले ही डेंट पेट कर दिए गए हैं पर अंदर अधिकांश शौचालयों में काम पड़े हुए हैं। शौचालय प्रयोग न होने से ग्रामीणों में भी रोष व्याप्त है। जमालपुर: स्थानीय विकास खंड के 99 ग्राम पंचायतो में करोड़ों रुपये की लागत से सामुदायिक शौचालय का आधा अधूरा निर्माण कराया गया है। समूह की महिलाओं के खाते में धनराशि भेज दिया गया। लेकिन सामुदायिक शौचालय अभी तक चालू नहीं हो पाया है। बताया तो यहां तक जाता है कि अधिकांश सामुदायिक शौचालयो में उपर भले ही पानी की टंकी शो पीस के तौर पर रखा गया है लेकिन सबर्मिसिबल तक नहीं लगाए गए हैं। कहीं शौचालयों के गढ्ढे नहीं तो किसी में अंदर प्याले व दरवाजे तक नहीं लगाए गए हैं। विकास खंड के देवरिया, जलालपुर, शिवपुर, मिल्की ,मन उर, सहेवा, जगदीशपुर, बरीसलाहपुर, डोहरी, दौलताबाद, हमीदपुर सहित दर्जनों ग्राम पंचायतो शौचालय चालू न होने से ग्रामीणों में रोष है। सीखड़: विकासखंड में कुल 32 सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। प्रेमापुर, रामगढ़ व फुलहा में जमीन उपलब्ध ना होने के चलते अब तक इसका निर्माण नहीं हो सका है। अन्य सामुदायिक शौचालय को चालू करने के लिए समूह की महिला सदस्यों को न सिर्फ जिम्मेदारी दे दी गई है बल्कि तीन माह का मानदेय व सामान खरीदने के लिए उनके खाते में धन भेज दिया गया है। पूर्व के ग्राम प्रधानों के कार्यकाल में बने सामुदायिक शौचालय में नए ग्राम प्रधान अपने चहेतों को आवंटित करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कहीं-कहीं तो समूह की महिलाओं द्वारा संचालन किया जा रहा है। धनैता, छीतकपुर, रुदौली, डोमनपुर व सीखड़ आदि गांवों में ग्राम प्रधानों की ओर से सामुदायिक शौचालय समूहों को हैंडओवर नही अभी तक हैंडओवर नहीं किया गया है। कहीं-कहीं तो समूहों के खाते में आए धन में कमीशनबाजी के चलते उसका संचालन नहीं हो पा रहा है।
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