मिर्जापुर। हलिया थाना क्षेत्र के सोनगढ़ा गांव में तीन वर्ष पहले दहेज हत्या के मामले में गवाहों के मुकर जाने पर आरोपी दोषमुक्त हो गए, पर सरकारी गवाह और मेडिकल के आधार पर अपर जिला व सत्र न्यायाधीश त्वरित प्रथम वायुनंदन मिश्र की अदालत ने हत्या में दोषी पाते हुए मां और पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
लालगंज थाना क्षेत्र के रामपुर ठाकुर दयाल गांव निवासी दिनेश चंद्र कनौजिया ने थाने में तहरीर देकर बताया कि उसने अपनी पुत्री मीना की शादी जून 2018 को रामबाबू धोबी निवासी सोनगढ़ा थाना हलिया से किया था। दहेज में बाइक न मिलने पर रामबाबू और उसकी मां लवांगी देवी उसकी पुत्री को प्रताड़ित करते थे। छह जून 2019 की रात को उसकी पुत्री मीना ने मां गीता देवी को फोन कर बताया कि वह मर जाएगी। जिसके बाद उसके घर के लिए निकले। सात जून 2019 की भोर में पांच बजे सोनगढ़ा पहुंचे तो मीना घर में मरी पड़ी थी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। एडीजीसी फौजदारी सच्चिदानंद तिवारी ने बताया कि मामले में जो गवाह थे, वह दहेज हत्या मामले में पक्षद्रोही (मुकर जाना) हो गए थे। इस कारण रामबाबू और लवांगी को दहेज हत्या की धारा में दोषमुक्त कर दिया गया। उनको हत्या के वैकल्पिक धारा में दोषी पाया गया। जिस पर सरकारी अधिवक्ता ने सरकारी गवाह और साक्ष्य के आधार पर कड़ी से कड़ी सजा देने की अपील की। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित प्रथम वायुनंदन मिश्र ने सरकारी गवाह के बयान और मेडिकल के आधार पर वैकल्पिक धारा में दोषी पाए जाने पर लवांगी देवी और उसके पुत्र रामबाबू उर्फ सत्य नरायण को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। साथ ही 10 हजार का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड का 90 प्रतिशत हिस्सा मृतका की पुत्री को देने का आदेश दिया।