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हत्या के मामलों में पांच लोगों को आजीवन कारावास

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न्यायालय ने सोमवार को अलग-अलग मामलों में पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जमालपुर थाना क्षेत्र के बसंतपुर कान्ही गांव में वर्ष 2006 में दो पक्षों के बीच हुए विवाद में दोनों पक्ष के एक-एक व्यक्ति की हत्या हुई थी। मामले की सुनवाई करते हुए एडीजे प्रथम रचना अरोड़ा ने दोनों पक्ष के दो-दो आरोपितों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित भी किया है। दूसरा मामला चुनार थाना क्षेत्र के सहसपुरा गांव का है। वर्ष 2010 में हुई हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट लालबाबू यादव ने दोष सिद्ध होने पर आरोपित को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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जमालपुर थाना क्षेत्र के बसंतपुर कान्ही गांव में छह जुलाई 2006 को खेत में भैंस चराने के विवाद में दो पक्ष के लोगों के बीच हुए खूनी संघर्ष में दो लोगों की हत्या हुई थी। मामले की सुनवाई करते हुए एडीजे प्रथम रचना अरोड़ा ने दोनों पक्ष के दो-दो लोगों को दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। छह जुलाई 2006 को दो पक्षों में विवाद हुआ था। इसमें टेंगारी बिंद ने थाने में तहरीर देकर बताया कि रात नौ बजे उनके खेत में पड़ोसी सहंगू की भैंस धान का बेहन चरने लगी। मना करने पर विवाद हो गया।
आरोप लगाया कि सहंगू व उसके पुत्र संतोष बिंद व सुनीत बिंद बरछा, लाठी, तमंचा लेकर आ गए। विवाद के दौरान तमंचे से फायर किया गया। गोली उनके पुत्र पप्पू बिंद को लगी। इससे मौके पर ही मौत हो गई। दूसरे पक्ष की राजपति देवी ने थाने में तहरीर देकर बताया कि उनकी भैंस टेंगारी बिंद के खेत में चली गई थी। भैंस को हांक कर ला रही थी। इस पर पप्पू पुत्र टेंगारी ने गाली दी। मना करने पर टेंगारी व उनके पुत्र लाठी-डंडा तमंचा लेकर घर आए। लाठी व डंडे से पिटाई करने के बाद तमंचे से फायरिंग की। गोली उनके पति सहंगू को लगी। इससे उनकी मौत हो गई।
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पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। एक पक्ष के सुनीत बिंद व संतोष बिंद और दूसरे पक्ष के टेंगारी बिंद व उनके पुत्र बनवारी बिंद, चेतन बिंद जेल भेजे गए। बाद में जमानत पर रिहा हुए। इसमें टेंगारी की मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी पंकज कुमार सिंह ने गवाहों के अलावा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किया। एडीजे प्रथम रचना अरोड़ा ने गवाहों के बयान और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर एक पक्ष के सुनीत बिंद व संतोष बिंद और दूसरे पक्ष के बनवारी बिंद व चेतन बिंद को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
उधर चुनार थाना क्षेत्र के सहसपुरा (परसोधा) गांव निवासी रविंद्र नाथ पांडेय ने 29 नवंबर 2010 को चुनार थाने में तहरीर देकर बताया कि सुबह पांच बजे उनके छोटे भाई कमलाकांत पांडेय मंदिर में पूजा करने शिवशंकरी धाम के लिए निकले। इसके बाद वे अपने भतीजा अरुण कुमार पांडेय के साथ साढ़े पांच बजे मंदिर पहुंचे तो दरवाजा खुला दिखा। उनके भाई कमलाकांत वहां नहीं दिखे। तभी मंदिर के दक्षिण-पश्चिम की ओर स्थित यात्री निवास से कुछ आवाज सुनाई दी।
वहां से दोनों यात्री निवास की ओर गए तो कुछ लोग रास्ते में भागते हुए दिखे। इसमें से दो को पहचान लिया। अंदर कमरे में जाकर देखा तो भाई कमलाकांत मृत पड़े थे। उनके सिर, आंख और कनपटी पर गंभीर चोटें आई थीं। बताया कि रामप्रसाद छह माह पहले से शिव हनुमान मंदिर में पूजा पाठ करते थे। उसके गलत आचरण के कारण मंदिर के मालिक ने उसे हटाकर उसके भाई कमलाकांत को नियुक्त कर दिया था। इसलिए रामप्रसाद ने उसके भाई की हत्या की।
पुलिस ने रामप्रसाद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना कर पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। एडीजीसी राजेश कुमार यादव ने गवाहों और पत्रावली को अदालत में प्रस्तुत कर आरोपित को कड़ी से कड़ी सजा देने की अपील की। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट लालबाबू यादव ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपित रामप्रसाद यादव को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
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