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जिले में भी आजादी की अलख जगाई थी गांधी जी ने

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मिर्जापुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आजादी के लिए पूरे देश में भ्रमण किया था। इसी क्रम में वह मिर्जापुर भी आए थे। लोगों को संबोधित भी किया था। लालडिग्गी का गांधी मैदान व बथुआ का गांधी घाट उनकी स्मृति ताजा करता है। महात्मा गांधी वर्ष 1929 में जिले में आए थे। हालांकि उस समय के लोग अब नहीं हैं लेकिन अन्य बुजुर्ग यह बताते हैं कि गांधी जी लालडिग्गी के मैदान में आए थे। उस समय अछूतोद्धार कार्यक्रम चल रहा था। इसको लेकर गांधीजी जगह-जगह सभा करके लोगों को जात-पात का भेदभाव दूर करने की सलाह दे रहे थे। साथ ही देश की आजादी के लिए भी अलख जगा रहे थे। उनका कहना था कि यदि हम जाति -पात में इसी प्रकार बैठे रहे तो हमारी एकता कमजोर होगी। हम एक नहीं हुए तो आजादी हमसे दूर हो जाएगी। वह 1929 में प्रयागराज से चलकर मुजेहरा के रास्ते जिले में आए तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। उस समय वाहनों का अभाव था। अधिकतर पदयात्रा ही होती थी। लोगों से मिलते-जुलते गांधीजी लाल डिग्गी स्थित गांधी उद्यान पहुंचे। उस समय यह उद्यान नहीं था बल्कि एक विशाल मैदान था। चारों तरफ जंगल झाड़ी आदि थी। गांधी जी ने अपने संबोधन से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। इसके बाद वह बथुआ पहुंचे, वहां पर उस समय कर्णावती नदी की धारा बहती थी। वहां पर उन्होंने हाथ पैर धोया और कुछ क्षण विश्राम किया था। वहां पर वह कुछ देर के लिए रुके थे, उस स्थान को बाद में गांधी घाट के नाम से विकसित किया गया। वहां पर उनकी मूर्ति लगाई गई । लोग वहां जुट कर आजादी की बातें करते थे। इसके बाद गांधीजी चुनार के लिए रवाना हो गए। वरिष्ठ साहित्यकार बृजदेव पांडेय ने बताया की उस समय गांधी जी का जहां नाम ले लिया जाता, वहां पर सैकड़ों की भीड़ इकट्ठा हो जाती थी।
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