मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा सुविधा का जायजा लेने मंगलवार को आए प्रमुख सचिव चिकित्सा, शिक्षा और प्रशिक्षण आलोक कुमार के टेस्ट में स्वास्थ्य विभाग फेल हो गया। जिला महिला अस्पताल में निरीक्षण करने के दौरान एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) कक्ष में नवजात बच्चों का फॉलोअप नहीं किए जाने और दो दिन में ही नवजात को डिस्चार्ज किए जाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। कहा कि डेढ़ किलो वजन का बच्चा दो दिन में डिस्चार्ज होने पर घर जाने के बाद कैसे स्वस्थ हो पाएगा।
प्रमुख सचिव के कहने पर जब डाटा आपरेटर ने बच्चे के परिजनों को फोन कर स्वास्थ्य की जानकारी चाही तो बताया गया कि अस्पताल से आने के दूसरे दिन ही बच्चे की मौत हो गई थी। इस पर प्रमुख सचिव ने कड़ी नाराजगी जताई। इससे पहले उन्होंने एसएनसीयू वार्ड में भर्ती बच्चों के बारे में जानकारी ली। फॉलोअप किए जाने के बारे में पूछे जाने पर डाटा आपरेटर ने जवाब दिया। इस पर उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मेडिकल संबंधी बात आपरेटर कैसे कर पाएगा। लाइव टेस्ट लेने के बाद उनका कहना था कि अस्पताल में जैसी व्यवस्था होनी चाहिए, वह नहीं है।
उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चों को दो दिन में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जा रहा है। उसका फॉलोअप भी नहीं किया जा रहा है, ऐसे में तो बच्चे की मौत भी हो सकती है। उन्होंने इस बात भी नाराजगी जताई कि अस्पताल में केएमसी (कंगारू मदर केयर) यूनिट भी नहीं चल रहा है। बताया जा रहा है कि स्टाफ की कमी है, परंतु यही बजट तो अन्य जिलों में भी है।
उन्होंने बताया कि बहराइच में 685 ग्राम के बच्चे को बचाया गया। यहां डेढ़ किलो के बच्चे की मौत हो जा रही है। वहां पर केएमसी यूनिट बेहतर चल रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बहराइच के लोगों से बात करके केएमसी यूनिट को बेहतर तरीके से संचालित करने की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने आए प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने मंडलीय अस्पताल में निर्माणाधीन भवन का भी अवलोकन किया। इस निर्माणाधीन भवन में जिला महिला अस्पताल अस्थायी तौर पर शिफ्ट किया जाना है। ताकि महिला अस्पताल में नए भवन का निर्माण हो सके। निर्माणाधीन भवन के निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यहां कौन-कौन से कार्य होने हैं, इस बारे में कार्यदायी संस्था व अन्य जिम्मेदार लोगों से बात कर कार्य की लिस्ट बनवा लें। महिला अस्पताल का भवन गिराने के बाद महिला अस्पताल को निर्माणाधीन भवन में शिफ्ट किए जाने के बारे में जानकारी ली। उन्होंने निर्माणाधीन अस्पताल के पीछे बाउंड्री के पास बने भवन के बारे में भी जानकारी ली। आवास का कार्य पूरा है कि नहीं, इस बारे में पूछताछ की। उन्हें बताया गया कि उस पर एसआईटी की जांच चल रही है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने उन्हें निर्माणाधीन भवन में महिला अस्पताल शिफ्ट होने पर कहां क्या व्यवस्था होगी, इसके बारे में जानकारी दी। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक राम अग्निहोत्री ने बताया कि डेंगू के मरीजों की संख्या कम होते ही 20 दिन में बाकी कार्य कर दिए जाएंगे। नया साल आने तक महिला अस्पताल शिफ्ट कर दिया जाए। निरीक्षण के दौरान सबसे पहले मंडलीय अस्पताल पहुंचे प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने इमरजेंसी के सामने बने इमरजेंसी कक्ष में भर्ती मरीजों से बात की। इसके बाद चिल्ड्रेन वार्ड पहुंचे। वहां एक गंभीर रोग से पीड़ित बालक शिवा यादव निवासी चेतगंज के परिजनों से बात की। बेड पर चादर नहीं होने पर उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से नाराजगी जताई। बच्चे के बेहतर इलाज के लिए उन्होंने रिपोर्ट मांगी। ताकि उसका इलाज एसजीपीजीआई में कराया जा सके।
इसके बाद वे डेंगू वार्ड पहुंचे। वहां एक नंबर बेड पर भर्ती मानसी पांडेय निवासी बरौधा से बात उन्होंने बात कर यहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। इस दौरान सीडीओ श्रीलक्ष्मी वीएस, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल, एसआईसी डॉ. अरविंद सिंह, सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. सुनील सिंह, डॉ. दिलीप चौरसिया, मैनेजर अनुज ठाकुर आदि मौजूद रहे।