मिर्जापुर। आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने में सरकारी अस्पताल फिसड्डी साबित हो रहे हैं। हाल के दिनों में मेडिकल काॅलेज होने का बाद मंडलीय व जिला महिला अस्पताल में जरूर आयुष्मान योजना के तहत इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है, परंतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तो आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वालों की संख्या सबसे कम है। कुछ सीएचसी में तो एक भी इलाज आयुष्मान योजना के तहत नहीं हुआ है। वहीं निजी अस्पतालों में अपेक्षाकृत कई गुना ऑपरेशन हुए हैं।
आयुष्मान योजना के लाभार्थी मरीजों के इलाज के लिए जिले के 43 अस्पताल पंजीकृत हैं। इनमें 17 अस्पताल सरकारी हैं। सरकारी अस्पतालों में मंडलीय अस्पताल, जिला महिला अस्पताल के अलावा सीएचसी शामिल हैं। आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्डधारक का एक वर्ष में पांच लाख रुपये तक का इलाज किया जाता है। जिले में आयुष्मान योजना के तहत 284705 परिवार लाभान्वित हैं। इनमें 1272861 सदस्य शामिल हैं। जिले में अब तक निजी अस्पतालों में 22128 लोगों ने इलाज कराया है और सरकारी अस्पतालों में अब तक 3356 लोग ही आयुष्मान योजना के लाभार्थी के तौर पर इलाज कराया है। सरकारी अस्पतालों में जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक जनरल मेडिसिन से लेकर सर्जरी और प्रसव तक की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, परंतु सरकारी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत सुविधा दिलाने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं।
हाल के दिनों में मंडलीय अस्पताल और जिला महिला अस्पताल मेडिकल काॅलेज के अधीन होने पर प्राचार्य डाॅ. आरबी कमल की पहल पर इन दोनों अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज में तेजी लाई गई है, परंतु सीएचसी में तो पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान आयुष्मान योजना के बहुत कम लाभार्थी मरीजों का इलाज नहीं हुआ है। इनमें सीएचसी पड़री, पटेहरा, हलिया में एक भी व्यक्ति का आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं हुआ है।
सीएचसी विजयपुर में आठ, कछवां में चार, गुरसंडी में 12, सीखड़ में दो, विंध्याचल में 14, मड़िहान में एक, चुनार में 15, लालगंज में पांच, जमालपुर में 40, अहरौरा में 52, राजगढ़ में 115, चील्ह में 87 लोगों को इलाज का लाभ मिला है। मंडलीय अस्पताल में 162 और जिला महिला अस्पताल में 213 लाेगों को लाभ मिला है। वहीं कई निजी अस्पतालों में तीन हजार से दो हजार लोग आयुष्मान योजना का लाभ ले चुके हैं। सरकारी अस्पताल के फिसड्डी होने का एक कारण यह भी है कि कई सीएचसी में आयुषमान मित्रों की तैनाती नहीं की गई है। इससे वहां कार्य प्रभावित हो रहा है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आरबी कमल का कहना है कि आयुष्मान योजना के तहत मंडलीय अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में गरीबों का इलाज किया जा रहा है। उनको बेहतर सुविधाएं दी जा रही है। आयुष्मान योजना के लाभार्थी के कई बड़े ऑपरेशन मंडलीय अस्पताल में हुए हैं। जिसमें मरीज का बाहर निजी अस्पताल में ऑपरेशन में कई लाख रुपये लग रहे थे और उसे रेफर कर दिया गया था। आयुष्मान भारत योजना के नोडल एसीएमएओ डॉ. मुकेश कुमार का कहना है कि 17 सरकारी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं। इसमें जिला से लेकर सीएचसी तक जोड़े गए हैं। जिले के अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज हो रहा है। सीएचसी में एनेस्थेटिक की कमी के कारण समस्या आ रही है। जहां आयुष्मान योजना के लाभार्थी का इलाज नहीं हो रहा है, वहां व्यवस्था बेहतर की जाएगी।