कई भक्तों ने इस धोखाधड़ी की शिकायत शासन प्रशासन से की है। जिलाधिकारी व विंध्य विकास परिषद की अध्यक्ष दिव्या मित्तल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आठ सदस्यीय टीम गठित कर ऐसी वेबसाइट की जांच के आदेश दिए हैं।
तीन वेबसाइट निलंबित, संचालकों की तलाश
आठ सदस्यीय टीम की शुरूआती जांच में ऐसी कई वेबसाइट का पता चला है। इनमें से तीन को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही वेबसाइट में अब तक हुईं गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। संचालकों की तलाश में भी पुलिस जुटी है। वेबसाइट की जांच के लिए साइबर टीम को भी लगाया गया है। धोखाधड़ी मिलने पर संचालकों पर मुकदमा तक करने की तैयारी चल रही है। ऐसी वेबसाइट का निर्माण भविष्य में न हो, इस पर भी काम चल रहा है ताकी भक्तों को गुमराह न किया जा सके।
जांच टीम का नेतृत्व सीओ सिटी परमानंद कुशवाहा करेंगे। तहसीलदार सदर व सदस्य विंध्य विकास परिषद अरुण कुमार गिरी टीम के संयोजक हैं। सदस्यों में डीआईओ अभिषेक श्रीवास्तव, सहायक सूचना अधिकारी ओम प्रकाश उपाध्याय, विधिक सलाहकार नरेश चंद गुप्ता, प्रभारी निरीक्षक विंध्याचल, श्रीविंध्य पंडा समाज से पंकज द्विवेदी, श्रीविंध्य पंडा समाज के मंत्री भानु पाठक शामिल हैं। यह टीम जांच के साथ भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी व मनमानी न हो इसके लिए सुझाव भी देगी।
शासन, प्रशासन की ओर से विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्य विकास परिषद से संबंधित कोई भी आधिकारिक वेबसाइट संचालित नहीं की जा रही है। मां विंध्यवासिनी मंदिर विंध्याचल धाम के नाम पर जो भी वेबसाइट हैं, वह अनाधिकृत है। अगर कोई वेबसाइट या फेसबुक पेज के माध्यम से भक्तों को गुमराह करता या धोखाधड़ी करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसी किसी वेबसाइट या फेसबुक पेज से संबंधित सूचना 9454401590 या 9454404016 पर दी जा सकती है।