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Mirzapur News: औद्यानिक खेती और मछली पालन से करें कमाई

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सीखड। अदलपुरा स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में आयोजित कृषि मेले के दूसरे दिन रविवार को दो तकनीकी सत्रों में 12 विषयों पर चर्चा हुई। इसमें यूपी, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश के 2800 से अधिक किसानों ने भागीदारी की। महिला किसानों की संख्या एक हजार से ज्यादा रही। संस्थान के निदेशक डॉ. तुषार कांति बेहेरा ने किसानों के उत्थान के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। मत्स्य, पशुपालन एवं सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी पर आधारित सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. यूएस गौतम ने कहा कि देश में कृषि उत्पादन में लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को कृषि क्षेत्र में आकर्षित करने की भारत सरकार की योजना आर्या (अट्रेक्टिंग रूरल यूथ इन एग्रीकल्चर) के बारे में जानकारी दी। कहा प्रधानमंत्री की ओर से 15000 ड्रोन दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पर व्यापक ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है। मशरुम उत्पादन पर डॉ. सुदर्शन मौर्य ने जानकारी दी। ओडीशा के डॉ. सूर्यकांत मिश्र ने कुक्कुट पालन के फायदे पर चर्चा की। पशु रोग विज्ञानी डॉ. एनके सिंह ने पशुओं की समस्याओं और उनके समाधानों के बारे में बताया। डॉ. पीके प्रधान ने मछली पालन एवं उसके व्यवसाय से होने वाले लाभ के बारे में किसानों को बताया। दुग्ध प्रसंस्करण एवं कृत्रिम गर्भाधान पर डॉ. आर के मित्तल ने व्यापक संवाद करते हुए कहा कि देश में आठ करोड़ से अधिक किसान दुग्ध उत्पादन और विपणन से सीधे तौर पर लाभ ले रहे हैं। डॉ. आनंद कुमार सिंह ने कहा कि कृषि ग्रामीण आबादी जो अभी भी भारत में एक बड़ी जनसंख्या है। उनके आत्म निर्भर होने का प्रमुख आधार है। सहायक महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् डॉ. सुधाकर पांडेय ने सब्जियों की पोषण क्षमता से मानव स्वास्थ्य संवर्धन के बारे में बताया। कृषि विशेषज्ञों ने फल उत्पादन, पुष्प उत्पादन एवं उनके निर्यात पर भी परिचर्चा की। सत्र में समन्वयक आइआइवीआर के वैज्ञानिक डॉ. आत्मानंद त्रिपाठी रहे। संचालन डॉ. डी राम भारद्वाज और डॉ. केके पांडेय ने किया।
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