मिर्जापुर। नगर में अमृत योजना के तहत सीवर व जलापूर्ति की पाइप लाइन बिछाने का काम किया गया है, लेकिन घरों तक कनेक्शन नहीं होने से लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
नगर में 210 करोड़ रुपये की लागत से सीवर लाइन बिछाने का काम किया गया है। इसके तहत क्षेत्र में 203 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाई जा रही है, जबकि विंध्याचल में 50 करोड़ रुपये की लागत से 25 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाने का प्रस्ताव था। अब सभी जगह सीवर लाइन बिछाई जा चुकी है। मैनहोल भी बनाए जा चुके हैं। नगर में घरों के आगे चैंबर बनाने का काम कर लिया गया है, लेकिन चैंबरों से घरों के कनेक्शन नहीं हो सके हैं। इसके चलते लोगों को सीवर लाइन की योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि नगर के 32000 घरों का सीवर लाइन से कनेक्शन जोड़ा जाना है। इसके लिए काम चल रहा है।
इसी प्रकार नगर क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए 193 करोड़ रुपये की लागत वाली अमृत योजना पहले से संचालित है। इसके तहत शास्त्री सेतु के पास एक इन्टेक वेल बनाया गया है। इसमें गंग नदी से पानी लेकर पाइप लाइन के जरिए लालडिग्गी स्थित जल शोधन संयंत्र में भेजा जाता है। इस 60 एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र में पानी शोधित कर पाइप लाइन के जरिए ओवरहेड टैंकों तक भेजा जाएगा। इसके लिए नगर में पांच ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। इन ओवरहेड टैंकों के माध्यम से सभी जगह जलापूर्ति की जाएगी।
नगर में पानी की दैनिक मांग 35 एमएलडी है, जबकि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर 60 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र लगाया गया है। योजना के तहत लगे सभी संयंत्र काम तो करने लगे हैं, लेकिन जलापूर्ति के लिए नए कनेक्शन नहीं होने अभी तमाम लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि पुरानी अमृत योजना के तहत 13 हजार कनेक्शन किए गए हैं, जहां इस नए संयंत्र के जरिए जलापूर्ति की जा रही है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अमृत योजना के तहत इन्टेक वेल व अन्य कार्य किए जाने थे, लेकिन उसमें नगर में 35000 लोगों के यहां जलापूर्ति के लिए कनेक्शन जोड़ने की व्यवस्था नहीं थी। इसलिए अमृत योजना - दो के तहत इस कार्य को कराने के लिए कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। कार्यदायी संस्था गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक संजय कुमार ने बताया कि कार्ययोजना को शासन से स्वीकृति मिलने पर निविदा की प्रक्रिया पूरी कर कार्य शुरू करा दिया जाएगा।