जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने बुधवार को मानवता का अप्रतिम उदाहरण पेश किया। जिलाधिकार कार्यालय परिसर में बुधवार को सुबह एक दिव्यांग अचेत हो गया। एंबुलेंस आने में देर होने पर जिलाधिकारी ने एक अधिकारी के निजी वाहन से दिव्यांग को मंडलीय अस्पताल भेजवाया। जहां दिव्यांग का इलाज चल रहा है। चिकित्सकों ने उसकी हालत स्थिर बताई है। विषाक्त पदार्थ के सेवन की आशंका भी जताई है। उधर, मंडलीय अस्पताल में हालत बिगड़ने पर दिव्यांग को देर शाम बीएचयू ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। इस बीच ट्रामा सेंटर ले जाते समय दिव्यांग जनक लाल की मौत हो गई।
सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह दिव्यांग का कुशलक्षेम जानने अस्पताल पहुंचे। परिजनों से भी कारण जानने का प्रयास किया, परंतु अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस को भी सूचना दी गई है। जिलाधिकारी ने पत्रकारों से इस संबंध बात की। उन्होंने बताया कि बुधवार को सुबह जिगना थाना क्षेत्र के बिहसड़ा खुर्द निवासी दिव्यांग जनक लाल (30) पुत्र परानू व्हील चेयर से डीएसओ कार्यालय की तरफ से होते हुए मुख्यालय पहुंचे। वे अस्वस्थ नजर आ रहे थे। डीएम कार्यालय के गेट पर व्हीलचेयर खड़ा कर परिसर में अंदर घुसे और एक पेड़ के जगत पर बैठ गए। कुछ ही देर में उन्हें उल्टी होने लगी। उनके कार्यालय के गार्डों ने देखा तो वे उनके पास पहुंचे। इस बीच जनक लाल बेहोश हो गए। उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी जब उन्हें मिली तो उन्होंने नगर मजिस्ट्रेट को कार्यालय में बैठे जिलाधिकारी को जैसे ही पता चला उन्होंने तुरंत नगर मजिस्ट्रेट को जनक लाल को अस्पताल भेजने का निर्देश दिया। इस बीच फोन के बावजूद एंबुलेंस आने में देर होने पर उन्होंने एक अधिकारी के वाहन से दिव्यांग को मंडलीय अस्पताल भेजवाया। उन्होंने बताया कि जनक लाल को सीसीयू वार्ड में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। एक वर्ष से वह जमुनहिया पुरानी लाइन अपने मौसी सावित्री देवी के घर रह रहा था। यह पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो है। जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने बताया कि वह क्यों और कैसे बीमार हुआ, उसे क्या समस्या थी, इसकी जांच कराई जा रही है। परिजनों से बात की गई, परंतु वे बहुत कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं हैं।