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रामसेतु का पत्थर होने की चर्चा, लोग करने लगे पूजा

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सीखड़ क्षेत्र में गंगा में तैरते मिले पत्थर को कुछ लोग रामसेतु का पत्थर मान रहे हैं। वही कुछ लोग अलौकिक पत्थर मानने से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक वैज्ञानिक इसकी जांच नहीं कर लेते, तब तक विश्वसनीयता पर संदेह है।
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लालपुर गांव निवासी बचाऊ शर्मा ने बताया कि यह अलौकिक पत्थर गंगा में प्राप्त हुआ है और हमें पूरा विश्वास है कि यह रामसेतु का ही पत्थर है। इस पत्थर को लोगों ने बार-बार पानी में डुबोने का प्रयास किया, लेकिन पत्थर पानी पर तैरता ही रहा। इसके बाद उसे सीखड़ स्थित विष्णु भगवान के मंदिर में रखा गया है। लोग उसकी पूजा अर्चना कर रहे हैं। गांव में उक्त पत्थर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। सोशल मीडिया में भी पत्थर की खूब चर्चा रही। उधर, इस बारे में जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि यह चमत्कार नहीं है बल्कि एक वैज्ञानिक तथ्य के कारण पत्थर पानी में तैर रहा था। उन्होंने बताया कि जब किसी पत्थर का घनत्व पानी के घनत्व से कम हो जाता है तो वह पानी में तैरने लगता है। इसको प्लवन के नियम से समझा जा सकता है। संभव है कि जो पत्थर तैर रहा है। वह आकार में छोटा हो और उसका घनत्व पानी के घनत्व से कम हो। इसलिए वह पानी में तैर रहा है। तैरते मिले पत्थर में असंख्य छिद्र हैं। जानकार बताते हैं कि ऐसे पत्थरों के छिद्र में हवा भरी रहती है। उनका घनत्व कम होता है और वो आसानी से पानी में तैर लेते हैं।
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