घोड़े शहीद स्थित गंगा में गिरता नाला का पानी ।
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मिर्जापुर। गंगा को साफ रखने का प्रयास किया जा रहा है, जो अभी हकीकत में नहीं दिख रहा है। गंगा को स्वच्छ व साफ रखने को लेकर जिला प्रशासन गंभीरता लोगों को नजर नहीं आ रही है। तमाम प्रयासों के बाद भी गंगा में 17 अनटैब्ड नालों से गंदा पानी बिना शोधित किए ही गिर रहा है। हालांकि 10 टैब्ड नालों का लगभग 16.58 एमएलडी पानी शोधित करके गंगा में गिराया जा रहा है। नगर का गंगा में अभी भी 17 अनटैब्ड नालों से लगभग 12.365 मिलियन लीटर पर डे (एमएलडी) गंदा पानी बिना शोधित किए ही गिर रहा है। हालांकि 10 टैब्ड नालों का लगभग 16.58 एमएलडी पानी शोषित करके ही गंगा में गिराया जा रहा है। बावजूद इसके अभी भी 12.365 एमएलडी गंदा पानी जिला प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। जिले के 14 उद्योगों में ईटीपी स्थापित किया गया है, जिनमें नालों के द्वारा पानी को गंगा में निस्तारित किया जाता है। गंगा को निर्मल बनाने के लिए किनारे के 67 गांवों में प्रशिक्षण दिया गया है। जनपद में निकलने वाले गंदे पानी का निस्तारण आज भी गंगा में गिराकर ही किया जा रहा है, जो एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस समस्या के निस्तारण के लिए जिला प्रशासन, जल निगम और प्रदूषण नियंत्रण विभाग को कड़े कदम उठाने की जरूरत है। नगर में बनने वाले तीन एसटीपी से नगर के नालों का गंदा पानी शोधित किया जाएगा। हालांकि इसमें से विंध्याचल में बनने वाला सात एमएलडी का एसटीपी पूरा हो गया है। केवल उसे शुरू करना बाकी है। उसके लिए बिजली कनेक्शन अभी नहीं मिला है। जिसकी वजह से वह चालू नहीं हो पा रहा है। इसके अतिरिक्त पक्का पोखरा और विसुंदरपुर में दो नए एसपीटी निर्माणाधीन है। इनमें से प्रत्येक साढ़े आठ एमएलडी का है। पक्का पोखरा में पहले से ही 14 एमएलडी का एसटीपी गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर रहा है। जब यह तीनों एसटीपी शुरू हो जाएंगे तो गंगा में गिरने वाले पानी की गंदगी काफी हद तक साफ हो सकेगी। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिशासी अभियंता अफजल खां ने बताया कि प्रदूषण को रोकने के लिए सभी नालों को टैप करने के लिए टेंडर प्रक्रिया की गई है। इसके लिए कार्य जल्द शुरू होने वाला है। जल्द ही गंगा को प्रदूषण मुक्त किया जाएगा।