विंध्याचल। जगत जननी मां विंध्यवासिनी की चौखट पर शीश झुकाने के लिए मंगलवार को भी श्रद्धालुओं की दिन भर भीड़ लगी रही। भोर में मंगला आरती के बाद शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला दिन भर चलता रहा। इस दौरान स्नान के लिए गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि पर मंगलवार को देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु रेलवे स्टेशन व विभिन्न वाहन स्टैंडों पर उतरने के बाद सीधे गंगा में स्नान के लिए घाटों की ओर प्रस्थान कर रहे थे। दीवान घाट, पक्का घाट, गुदारा घाट, कच्चा घाट, इमली घाट समेत अन्य घाटों पर स्नान के बाद हाथों में प्रसाद, नारियल, चुनरी लिए माता के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर कतारबद्ध हो जा रहे थे। मंगला आरती से पहले ही सभी प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। मंगलवार को भोर में मंगला आरती के बाद मंदिर का कपाट खुलते ही श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाने के लिए बेताब हो गए। किसी ने गर्भगृह तो किसी न झांकी से ही मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप के दर्शन किए। मां के दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर रहे। दर्शन-पूजन का सिलसिला मध्याह्न आरती तक अनवरत जारी रहा। मंगलवार होने के कारण भोर से विंध्याचल मंदिर में भीड़ लगी रही। मंदिर जाने वाले सभी मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मध्याह्न आरती के बाद भीड़ थोड़ी कम हुई। कुछ देर बाद फिर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई। उधर, मां विंध्यवासिनी और मंदिर परिसर में स्थित सभी विग्रहों के दर्शन के बाद श्रद्धालु त्रिकोण मार्ग पर विराजमान माता काली और अष्टभुजा देवी के दर्शन के लिए प्रस्थान कर रहे थे। त्रिकोण मार्ग पर स्थित माता काली व अष्टभुजा देवी मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से पटे रहे। चिलचिलाती धूप में नंगे पांव कालीखोह पहुंचकर माता काली के दर्शन के बाद दुर्गम पहाड़ी के रास्ते अष्टभुजा मंदिर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने मां अष्टभुजा देवी के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। अष्टभुजा देवी के दर्शन के लिए भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।