मिर्जापुर। मेडिकल काॅलेज के अधीन मंडलीय और जिला महिला अस्पताल में चार अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं, परं दो दिन से मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए जाने वाले लोगों को बताया जा रहा है कि मशीन खराब है, जबकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि रेडियोलाॅजिस्ट छुट्टी पर है, इसलिए अल्ट्रासाउंड मशीन का संचालन नहीं हो रहा है। अस्पताल प्रशासन की इस हीलाहवाली का खामियाजा मरीजों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
जिला महिला अस्पताल में आने वाली हर गर्भवती महिला को प्रसव से पहले तक दो से तीन बार अल्ट्रासाउंड कराना होता है, परंतु जिला महिला अस्पताल में पिछले तीन साल से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। मंडलीय अस्पताल में पेट दर्द आदि में डाॅक्टर मरीज को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लिखते हैं। लंबे समय तक तो मंडलीय अस्पताल में भी अल्ट्रासाउंड मशीन का संचालन नहीं हो रहा था। मंडलीय और जिला महिला अस्पताल मेडिकल काॅलेज के अधीन होने के बाद एक रेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती हुई है। अस्पताल में प्रतिदिन 80 के करीब अल्ट्रासाउंड होता है। इनमें गर्भवती महिलाओं समेत सभी का अल्ट्रासाउंड होता है। मंडलीय अस्पताल में तीन और जिला महिला अस्पताल में एक अल्ट्रासाउंड मशीन है।
अस्पताल के बाहर अल्ट्रासाउंड कराने में 800 रुपये से 1000 रुपये तक खर्च होते हैं। मंडलीय अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की नि:शुल्क व्यवस्था है। पिछले दो दिन से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। अल्ट्रासाउंड कराने आए मरीजों ने बताया कि डॉक्टर मशीन खराब बता रहे हैं, इसलिए अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। इस बारे में अस्पताल प्रशासन से बात करने पर बताया गया कि मशीन खराब नहीं है। अल्ट्रासाउंड के लिए चार मशीनें हैं। डाॅक्टर छुट्टी पर गए है। इसलिए जांच नहीं हो पा रही है। उधर, अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंट कराने के लिए विवश होना पड़ रहा है। मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ.तरुण सिंह का कहना है कि अल्ट्रासाउंड मशीन खराब नहीं है। मंडलीय और महिला अस्पताल में कुल चार अल्ट्रासाउंड मशीने हैं। रेडियोलाॅजिस्ट एक है। इस कारण उनके छुट्टी पर जाने पर समस्या उत्पन्न होती है।