अपर सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट पीएन श्रीवास्तव ने बहू की हत्या के जुर्म में दोष सिद्घ पाते हुए 65 वर्षीया सास को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सास को पंद्रह हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित कर जेल भेज दिया। संदेह का लाभ देते हुए ननद को बरी कर दिया।
अभियोजन अनुसार जिगना थाना क्षेत्र के बिहसड़ा बाजार निवासी जिन्नत बेगम 65 वर्ष पत्नी असगर अली तथा उसकी पुत्री बेगी उर्फ शांहजहां पर आरोप है उसने अपनी बहू रूबिया बानो को उसके मायके इलाहाबाद जनपद के थाना कोरावं से विदा करा कर अपने घर ले आई और उसकी गला दबा कर हत्या कर दी। मृतका के पिता एवं वादी मुकदमा जलालुदीन ने दस अक्तूबर 2010 को थाने में तहरीर दिया कि उसने अपनी पुत्री का निकाह असगर अली के पुत्र वारिस अली के साथ किया था।
आरोप है शादी में बाइक की मांग को ले करके मायके वाले उसे प्रताड़ित करते थे। बाइक की मांग पूरी नहीं करने पर दस अक्तूबर 2010 को उसकी गला दबा कर कर हत्या कर दी। वादी की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी सास जिन्नत बेगम व ननद बेगी उर्फ शाहजहां के खिलाफ धारा 498 ए,304 बी के तहत मामला पंजीकृत कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केके पांडेय ने कुल छह गवाह प्रस्तुत किया।
जिसकी सुनवाई कोर्ट ने मंगलवार को किया। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, अधिवक्ताओं की दलील तथा गवाहों केे बयान के आधार पर न्यायालय ने सास जिन्नत बेगम को धारा 302-34 में दोषसिद्घ पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित कर जेल भेज दिया।