अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय देवकांत शुक्ला ने दहेज हत्या के मामले में पति, सास, ससुर, देवर को दोषसिद्ध पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार कछवां थाना क्षेत्र के दियाव गांव निवासी पति रंजीत गौड़, ससुर महेंद्र गौड़, देवर दिलीप गौड़ तथा सास हीरावती देवी के खिलाफ थाना कछवां में धारा 498 ए, 304 बी भारतीय दंड संहिता 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया।
अदलहाट थाना क्षेत्र के भोरमार माफी गांव निवासी रामआसरे गौड़ ने अपनी पुत्री सरिता की शादी 25 मई 2013 को रंजीत निवासी दियाव कछवां के साथ की थी। आरोप है शादी के बाद से ही ससुराली सरिता को सोने की चेन, अंगूठी और सोफा की मांग को लेकर प्रताड़ित करते थे। जिसकी सूचना उसने अपने पिता को दी थी।
पांच नवंबर 2014 को दहेज की मांग को लेकर सरिता को काफी मारापीटा गया और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था।
जिसकी सुनवाई न्यायालय द्वारा शनिवार को की गई। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेश कुमार यादव और केके पांडेय ने सभी गवाहों को प्रस्तुत कराया। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य गवाहों के बयान अधिवक्ताओं की दलील के आधार पर न्यायालय ने पति, सास, ससुर तथा देवर को सरिता की हत्या के आरोप में दोषी पाया।