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पुलिस कम्युनिटी सेंटर बैंड होने के कगार पर

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राजगढ़। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गरीब परिवारों की लड़कियों को स्वावलंबी बनाने के लिए पांच सिलाई-कढ़ाई केंद्र खोले गए हैं। इसका संचालन नक्सल फंड से किया जाता है लेकिन विगत आठ माह से पुलिस कम्यूनिटी सेंटर पर तैनात टीचरों का मानदेय नहीं मिला है। इससे सेंटर की बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। सेंटर पर तैनात अध्यापको ने पुलिस अधीक्षक से मांग किया है, कि सेंटरों की दयनीय हालत में सुधार लाए अथवा मानदेय दिलवाते हुए उसको बंद करवा दे।
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वर्ष 2000 व 2001 के दौरान जनपद में प्रदेश की सबसे बड़ी नक्सली घटनाए हुई थीँ। भवानीपुर कांड में 16 नक्सली मारे गए थे जबकि खोरडीह पीएसी कैंप पर लूट कांड की घटना हुुई थी। जिसकी वजह जांचने पर पुलिस ने गरीबी, मजदूरी, शिक्षा और धन का अभाव होने के चलते ऐसी घटना होना पाया। जिसके निदान एवं पुलिस कर्मियों की सुरक्षा, नक्सल भत्ता हेतु की मांग करने पर प्रदेश सरकार ने नक्सल फंड की शुरूआत की। नवंबर 2011 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के.सत्यनारायण ने राजगढ़, सक्तेशगढ़, शेरवा, संत नगर, अहरौरा में सिलाई कढ़ाई केंद्र खोलवाया। जहां पर पुलिस और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से सिलाई मशीन की व्यवस्था कर कराई गई। वहीं जालान से कपड़े सिलाई के लिये दिलवाया जाता था। धीरे धीरे सब सिमटता गया, अब टीचरों के मानदेय के लाले पड़ गए हैं। सिलाई सेंटरों में 80 के बजाय मात्र तीन चार छात्राए ही सिलाई सीखने आती है, सभी सेंटरो की अधिकांश मशीन खराब है और टीचरों का आठ महीनों से मानदेय नहीं मिला है। वर्तमान पुलिस अधीक्षक के खेलकूद व तकनीकी प्रशिक्षण पर ज्यादा ध्यान देने से सिलाई सेंटर की दशा दयनीय हो चुकी है अब वह बैंड होने के कगार पर है। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की वे स्कूलों का प्रबंधन दुरुस्त करें या बकाया मानदेय देकर केंद्र बंद करा दें।
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