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किलर जोन साबित हो रहा है वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग

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वाराणसी-शक्तिनगर मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण होने के बाद से क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में दुर्घटनाओं की संख्या में 30 फीसदी का इजाफा हो गया है। 2018 में मात्र छ: माह में अब तक 30 लोगों की सड़क हादसों में जान चली गई है। लगातार बढ़ रहे दुर्घटना के बाद भी प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। और न ही सड़क निर्माण कंपनी द्वारा ही दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों में सांकेतिक बोर्ड लगाया जा रहा है। जिससे लोग अपने वाहनों की गति नियंत्रित कर गाड़ी चला सकें। फोरलेन सड़क के निर्माण के बाद से बढ़ रहे दुर्घटनाओं के रोकथाम के लिए कदम नहीं उठाने से लोगों के मरने की संख्या में इजाफा हो रहा है।
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वर्ष 2012 में सड़क दुर्घटना के 55 मामले प्रकाश में आए। जिसमें से 22 लोगों की जान चली गई थी। वर्ष 2013 में 60 दुर्घटनाओं में 20 लोगों की मौत हुई। इसी प्रकार 2014 में 57 दुर्घटनाओं में 18 लोगों की जान गई।
वर्ष 2015 में 65 दुर्घटनाओं में 27 मौतें हुईं। नारायनपुर से चोपन तक फोरलेन सड़क का निर्माण होते ही दुर्घटनाओं में वृद्धि हो गई। 2016 में दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में इजाफा होना शुरू हो गया। जहां 75 सड़क हादसों में 32 जानें चली गईं, वहीं वर्ष 2017 में हुए दुर्घटनाओं में 35 लोगों की जान गई। 2018 में मात्र छ: माह में अब तक 30 लोगों की सड़क हादसों में जान चली गई है। सोमवार को हनुमान घाटी के पास हुए सड़क हादसे में आठ लोगों की जान चली गई। इससे पूर्व क्षेत्र के घाटमपुर में वर्ष 2014 में टैंपो पलटने की वजह से एक साथ छह लोगों की मौत हुई थी । लगातार बढ़ रहे सड़क हादसे के बाद भी प्रशासन कोई सबक नहीं ले रहा है।
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