मिर्जापुर। अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट आलोक पांडेय ने पत्नी का गर्भपात कराने और उसकी हत्या के जुर्म में पति को दोष सिद्ध पाते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 40 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
अभियोजन अनुसार हलिया थाना क्षेत्र के अहुंगी खुर्द गांव निवासी एवं वादी मुकदमा श्रीकांत दूबे ने अपनी बहन नीलम की शादी 2007 में देहात कोतवाली क्षेत्र के छमुआ समोगरा निवासी उमेश तिवारी पुत्र बच्चन तिवारी के साथ की थी। अपनी क्षमता के अनुसार दहेज भी दिया था। दहेज में बाइक व पचास हजार रुपये की मांग को लेकर उसकी बहन को आए दिन उसके पति प्रताड़ित करते थे। नीलम ने इसकी सूचना फोन पर मायके वालों को दी थी। आठ अप्रैल 2012 को नीलम की लाश ससुराल में मिली थी। सूचना पर वादी मुकदमा श्रीकांत दूबे ने देहात कोतवाली में तहरीर देकर दहेज हत्या के जुर्म में पति उमेश तिवारी के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोपी के विरुद्घ 498 ए, 304 बी, 313 व 302 धारा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की तरफ सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी इस्लाम अहमद ने सभी गवाहों को प्रस्तुत कराया। अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई की। अधिवक्ताओं की दलील, पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, मृतका के मेडिकल के आधार पर न्यायालय ने आरोपी पति उमेश तिवारी को धारा 302 व 313 आईपीसी के तहत दोष सिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास के साथ 40 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित करते हुए जेल भेज दिया।