मड़िहान। वन विभाग में लाखों की हेराफेरी का मामला प्रकाश में आ रहा है। फर्जी मस्टररोल के सहारे श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान कर्मचारियों के खाते से हड़पने का गोरख धंधा मड़िहान रेंज में धड़ल्ले से चल रहा है। इसका खुलासा तब हुआ जब वनरक्षक ने श्रमिकों की मजदूरी बताकर संविदा कर्मी का मानदेय खाते से निकलवा लिया। कुछ दिनों तक कर्मचारी को पैसा देने की बात पर टालता रहा, लेकिन अब उसका पैसा देने से इनकार कर दिया। संविदाकर्मी ने थक हारकर जिलाधिकारी से शिकायत की है। न्याय के लिए अधिकारियों के कार्यालयों का वह दो वर्षों से चक्कर काट रहा है।
राजपुर ढेकवाह गांव निवासी बेचू वन विभाग के मड़िहान रेंज में संविदा पर वाचर का कार्यभार देखता था। रोजीरोटी के लिए अधिकारियों के आदेश निर्देश का पालन करता रहा। इस बीच उसके खाते से लाखों रुपए की हेरा फेरी होती रही। जब वह घपलेबाजी का विरोध करता तब नौकरी से निकालने की धमकी देकर उसका मुंह बंद कर दिया जाता था। अंत में वही हुआ जो होना था। बेचू का मानदेय का पैसा वनरक्षक ने यह कहकर बैंक से निकलवा लिया कि श्रमिकों की फर्जी मस्टररोल का मजदूरी भेजा है। बाद में जानकारी होने पर अपना मानदेय उससे मांगने लगा तो उसे नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। इधर बिटिया की शादी में पैसे की आवश्यकता पर अधिकारियों से न्याय की आशा लगाए बेसब्री से इंतजार कर रहा है। देखना है कि किसी अधिकारी का दिल पसीजता है कि उसे महज आश्वासन ही मिलेगा। इस संबंध में वनक्षेत्राधिकारी मड़िहान पीके मिश्रा ने कहना है कि लगाया गया आरोप निराधार है। मामले की जांच पुलिस को मिली है।