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बालिका की बलि देने में उम्रकैद

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मिर्जापुर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट विशेष शर्मा ने दस वर्ष की बालिका की बलि देने के जुर्म में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित करते हुए गुरुवार को जेल भेज दिया।
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अभियोजन के अनुसार कटरा कोतवाली क्षेत्र के भटवा की पोखरी निवासी एवं वादी मुकदमा विनोद कुमार पुत्र तिज्जू ने आठ जनवरी 2012 को कोतवाली में तहरीर दी। बताया कि उसकी दस वर्षीया पुत्री पूजा रात आठ बजे घर से सामान लेने दूकान गई थी। इसके बाद वापस नहीं आई। आरोप लगाया कि पड़ोस की शांति देवी पत्नी सुरेेश व उसके लड़के ओम प्रकाश ने पुत्री को गायब कर दिया है। दस जनवरी की सुबह सात बजे मोहल्ले में ही खड़े एक आटो रिक्शा के पिछली सीट पर एक बोरे में बालिका की लाश मिली।
पुलिस ने छानबीन के बाद राजेश विश्वकर्मा पुत्र दुलारे विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि संतान के लिए उसने लड़की की बलि दी है। उसने बालिका को आठ जनवरी की रात सामान देने के बहाने घर में बुलाया और कमरे में बने मंदिर के सामने उसके गर्दन को चाकू से रेत कर उसकी बलि दे दी। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दिया। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रविंद्र कुमार सिंह एवं अभियोजन अधिकारी जय गोविंद उपाध्याय ने 12 गवाह प्रस्तुत कराये। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा अधिवक्ताओं की दलील के आधार पर न्यायालय ने राजेश विश्वकर्मा को धारा 302, 201 भादस में दोषसिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास की सजा दी।
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