मड़िहान। मृतक भी जमीन बेचने लगे हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब क्रेता जमीन पर कब्जा करने पहुंचा तो असली जमीन मालिक भौचक रह गया। यह मामला मड़िहान थाना क्षेत्र के पिपराव गांव का है। जालसाजों के इस कारनामे का खुलासा होने पर असली जमीन मालिक ने अधिवक्ता समेत चार लागों पर मड़िहान थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
बिहार प्रांत के जमुई जिले के नया गांव लाल कोठी पोस्ट विधौर निवासी वीरेंद्र सिंह की आठ बीघा जमीन मड़िहान के गढवां पिपराव गांव में है। वीरेंद्र सिंह की 17 वर्ष पूर्व 29 फरवरी 2000 में मौत हो गई थी। तब से उनकी जमीन खाली पड़ी थी। जालसाजों ने धोखाधड़ी से उनकी जमीन बेच दी। इसके लिए उन्होेंने सुनियोजित तरीके से साजिश रची। जमीन के बिकाऊ होने की खबर फैला दी। जमीन बिकने की जानकारी होने पर सोनभद्र जनपद के घोरावल निवासिनी मुनक्का देवी जमीन खरीदने पहुंचीं। जालसाजों ने जमीन को आठ लाख में बेचने का सौदा तय किया। वर्ष 2014 जमीन बेचने के लिए एक व्यक्ति को वीरेंद्र सिंह बना कर उपनिबंधक कार्यालय मड़िहान में खड़ा कर आठ लाख रुपये में मुनक्का देवी को जमीन बेच दी।
जमीन लिखवाने के बाद मुनक्का देवी दो वर्ष तक शांत रहीं। दो वर्ष बाद जुलाई महीने में जब जमीन पर खेती करने पहुंची तो किसी ने इसकी सूचना वीरेंद्र सिंह के बेटे देवराज को दे दी। देवराज आए और उपनिबंधक कार्यालय मड़िहान से वस्तु स्तिथि पता की। उसके बाद उन्होंने देवरोज ने राजपुर गांव निवासी अधिवक्ता विजय करन सिंह, अमोई गांव निवासी जय प्रकाश मिश्रा, राजकिशोर व क्रेता मुनक्का देवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
इनसेट
फर्जी मतदाता पहचान पत्र लगा कर बेची जमीन
वीरेंद्र सिंह की मड़िहान के पिपराव गांव स्थित जमीन को बेचने के लिए वीरेद्र सिंह का फर्जी मतदाता पहचान पत्र इस्तेमाल किया गया है। इससे साबित होता है कि निर्वाचन कार्यालय भी बगैर किसी जांच पड़ताल के लोगों का निर्वाचन कार्ड बना देता है। जिसका फायदा उठा ऐसे जालसाज उठाते हुए लोगों को ठगने का कार्य करते हैं।