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दो सगे भाईयों को दस वर्ष की कैद

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मिर्जापुर। अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय देवकांत शुक्ला ने गैर इरादतन हत्या में दोषी पाए जाने पर शुक्रवार को तीन आरोपियों को सजा सुनाई। इसमें से दो आरोपी को दस वर्ष और महिला आरोपी को सात वर्ष की कैद की सजा दी गई। तीनों आरोपियों कि एक लाख एक हजार दो सौ पचास रुपये के जुर्माना से दंडित किया है।
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अभियोजन अनुसार देहात कोतवाली क्षेत्र के देवखरा गांव निवासी एवं वादी मुकदमा प्रकाश सिंह पुत्र इंदर सिंह ने कोतवाली में 16 मार्च 2009 को तहरीर दिया कि 16 मार्च को उसके पट्टीदार संजय कुमार उसके बेल के पेड़ पर चढ़कर बेल तोड़ रहा था। मेरे भाई चंद्र प्रकाश ने संजय को बेल तोड़ने से मना किया तो उसने अपने भाई सुनील पुत्र राजन सिंह को बुलाकर चंद्र प्रकाश को मारने पीटने लगा। जानकारी होने पर मेरे पिता इंदर सिंह और माता द्रुपत्ती देवी बीच बचाव के लिए दौड़े तो उन्हें भी संजय और सुनील सिंह मारने पीटने लगे। जबकि रेखा सिंह पत्नी संतोष सिंह ईट को लाठी डंडो से मारने लगे। मौके पर मौजूद सुनील के दोस्त धमेंद्र कुमार दूबे पुत्र जगतंबा प्रसाद दूबे के कहने पर रेखा सिंह पत्थर से मारने लगी। सुनील सिंह ने मेरे पिता को धक्का देकर गिरा दिया। चोटों के कारण इंदर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। तहरीर पर पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेश यादव ने न्यायालय के समक्ष कुल आठ गवाह प्रस्तुत कराया। न्यायालय ने राजेंद्र सिंह के दोनों लड़के संजय और सुनील सिंह एवं स्व. संतोष सिंह की पत्नी रेखा सिंह को दोषी पाया जबकि धर्मेंद्र कुमार दूबे पुत्र जगतंबा प्रसाद दूबे को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया।
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