विंध्याचल। शिवपुर स्थित रामगया घाट पर शनिवार से 16 दिनों तक चलने वाले पिंड दान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। अमावस्या तिथि पर यहां बड़ी संख्या में पितरों को पिंडदान करने की परंपरा है।
अव्यवस्थाओं का आलम यह कि शिवपुर बाजार से लेकर घाट तक बिजली, पानी, शौचालय, साफ- सफाई व प्रकाश व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। शाम होते ही गंगा घाट अंधेरे में डूूब जाता है। इधर गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद पानी कम होने पर घाटों की सीढ़ियों एवं आसपास कूड़ा, करकट व सिल्ट बिखरा हुआ है। मुक्तिधाम में भी बाढ़ का पानी घुस जाने के कारण गंदगी छाई हुई है। जिससे शवदाह संस्कार के लिए आने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। घाट किनारे शौचालय नदारद है। एक हैंडपंप के सहारे घाट पर श्राद्ध कर्म के लिए हजारों की संख्या में आने वाले लोग प्यास बुझाते हैं।
विंध्याचल। विंध्याचल धाम सिद्ध पीठ के लिए विश्व में विख्यात है। पितृ पक्ष में पिंडदान कर पितरों के तर्पण के लिए रामगया घाट एक बड़ा केंद्र है। इसे छोटी गया के नाम से भी जाना जाता है।मान्यता है कि त्रेता युग में प्रभु श्रीराम वनवास के समय माता सीता के साथ अपने पितृगण के लिए यहां गंगा के संगम तट पर तर्पण किया था। जिसके बाद से ही यहां यह परंपरा चली आ रही है। पितृपक्ष में 16 दिनों से अश्विन की अमावस्या तक राम का घाट पर निरंतर श्राद्ध कर्म के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। लेकिन अमावस्या के दिन यहां हजारों की संख्या में पितरों के पिंडदान के लिए जनपद सहित दूर-दराज के अन्य जनपदों से लोग पहुंचते हैं। यहां तर्पण व पिंडदान के लिए पहुंचते हैं। आध्यात्मिक धर्मगुरु एवं वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित त्रियोगी नारायण मिश्र ने बताया कि शिवपुर स्थित राम गया घाट की महिमा का वर्णन शास्त्रों में भी किया गया है। कहा जाता है कि यहां पर पूर्वजों के पिंडदान करने पर मोछ की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि प्रभु श्री राम वनवास के समय यहां पर आकर अपने पिता राजा दशरथ के लिए पिंडदान एवं तर्पण किया था। तभी से इस स्थान का नाम राम गया घाट पड़ गया। त्रेता युग से लेकर कालांतर युग तक राम गया घाट पर पिंडदान करने की वर्षो पुरानी परंपरा चली आ रही है।