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Mirzapur News: जिले में लहलहा रही हैदराबाद, जलगांव के केले की खेती

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मिर्जापुर। परंपरागत खेती से हटकर जिले में कई किसान केले की खेती कर रहे हैं। खेतों में धान की बजाय हैदराबाद, जलगांव, गुजरात व लखनऊ के केले के पौधे खेतों में लहलहा रहे हैं। इससे किसानों को अच्छी आमदनी भी हो रही है।
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शासन की ओर से मझवां, सीखड़, नरायनपुर व राजगढ़ विकास खंड को मिलाकर कुल 445 हेक्टेयर में केले की खेती का लक्ष्य आवंटित किया गया है। इस बीच जिले के किसान कुल 600 हेक्टेयर में केले की खेती कर रहे हैं। जुलाई व अगस्त माह में रोपे गए पौधों से 14 माह बाद किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 से 60 मीट्रिक टन उत्पादन की उम्मीद है। इससे छह से सात लाख रुपये तक की शुद्ध आय होने की उम्मीद है। अधिकांश खेतों में केले के फल तैयार हैं। बाजार में 16 से 17 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से केला किसानों की खेतों से ही उठ जा रहा है। मझवां विकास खंड में मितई के किसान कृष्ण मोहन त्रिपाठी, मुरलीधर, सीखड़ के मवैया गांव निवासी नीरज सिंह, राहुल सिंह, रविंद्र सिंह, रामचरित्तर सिंह, पचरांव के चंद्रशेखर, नरायनपुर बगही के सागवीर सिंह, अजीत सिंह, नरायनपुर पचेवरा के गोपाल कृष्ण, राजगढ़ जमुहार के बालकृष्ण आदि किसानों ने केले की खेती की है।
किसान जी-9 वेरायटी के टीसू कल्चर केले के पौधे लगाते हैं। एक हेक्टेयर में 3086 पौधे लगाए जाते हैं। जुलाई एवं अगस्त माह के बीच केले के पौधे लगाने का सही समय माना जाता है। केला तैयार होने में चौदह माह का समय लग जाता है। पौधे हैदराबाद, गुजरात, जलगांव व लखनऊ से मंगाए जाते हैं।जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम का कहना है कि परंपरागत के साथ ही किसानों में केले की खेती के प्रति रुझान बढ़ी है। जिले के अधिकांश विकास खंडों में केले की खेती की जा रही है। जिसमें 30 हजार 738 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से डीबीटी के माध्यम से किसानों को विभाग की ओर से अनुदान दिया जाता है।
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