मिर्जापुर। बच्चों को अनुपूरक पोषाहार, स्कूल पूर्व शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा देने के लिए शासन ने नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत अब आंगनबाड़ी केंद्र को लर्निंग लैब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए केंद्रों का चयन कर लिया गया है।
कोई भी आंगनबाड़ी केंद्र हो, वह हर घर से जुड़ा होता है।आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित टीकाकरण आदि जैसे कई कार्य होते हैं। ऐसी स्थिति में आंगनबाड़ी केंद्रों को ही प्रथम चरण में लर्निंग लैब के रूप में विकसित किए जाने की तैयारी की गई है। यहां स्वास्थ्य संबंधी सभी प्रकार के कार्य किए जा सकेंगे। जिले में 12 विकास खंड हैं। इनमें से प्रत्येक में एक-एक आंगनबाड़ी केंद्र को लर्निंग लैब के रूप में विकसित किया जाना है। इस पर सर्वे का कार्य शुरू भी करा दिया गया है। इन आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प करते हुए लर्निंग लैब के रूप में विकसित किया जाना है। इसके लिए यह जरूरी है कि आंगनबाड़ी केंद्र विभागीय भवन में संचालित हो, केंद्र को पूर्व में आदर्श केंद्र के रूप में चयनित न किया गया हो, केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका दोनों तैनात हों, संबंधित ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध निधियों में पर्याप्त बजट हो।
इसके लिए सिटी ब्लाॅक ग्रामीण के कतरन-एक, राजगढ़ के गगेरी, मड़िहान के ककरद-दो, नरायनपुर के संझौली-एक, हलिया के मवई कला, छानबे के विजयपुर- आठ, कोन के मुजेहरा कला-तीन, पहाड़ी के दुबेपुर मसारी, जमालपुर के गोगरहा, लालगंज के बामी-दो, सीखड़ के मेड़िया-तीन व मझवां के रामापुर-दो आंगनबाड़ी केंद्र का चयन किया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी वाणी वर्मा ने बताया कि इस योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में मानकों के अनुसार 18 मूलभूत अवस्थापना सुविधाएं पेयजल, शौचालय, केंद्र भवन की मरम्मत आदि कार्य कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बड़ी ग्राम पंचायतों में अधिक निधियां होती हैं। इससे इस योजना को बल मिलेगा।