मिर्जापुर। शुद्ध देसी घी के नाम पर मिलावटी घी बेचने वालों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया गया है। शुद्ध देसी घी के तीन वितरकों के नमूने लिए गए। इनमें से दो नमूने जांच में फेल हो गए। अब संबंधित वितरक पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
शुद्ध देसी घी के नाम पर बाजार में कई जह मिलावटी खाद्य पदार्थ भी बेचे जा रहे हैं। कई डिब्बा बंद व कई प्रकार के ब्रांडों के नाम से खुला देसी घी भी बेचा जा रहा है। आरोप है कि ज्यादातर स्थानों पर मिलावटी देसी घी बेची जा रही है। पूरे जिले में शुद्ध देसी घी के नाम से कई प्रतिष्ठान मिठाई का कारोबार करते हैं। वे अपने प्रतिष्ठानों पर शुद्ध देसी घी से निर्मित मिठाईयां भी लिखवाते हैं। उपभोक्ता असली देसी घी के नाम पर फंस जाता है और मिलावटी घी से बनी मिठाई लेकर जाता है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच में यह बात सामने आई है कि जिले में नकली देसी घी का कारोबार तेजी से हो रहा है। इसका विपरीत असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की जांच में तेजी लाई जानी चाहिए और हर स्तर पर शुद्ध देसी घी व तेल की जांच होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। सहायक खाद्य आयुक्त डाॅ. मंजुला सिंह ने बताया कि देसी घी के तीन वितरकों के यहां से नमूने लिए गए थे। नमूनों की जांच कराई गई। जांच में दो नमूने फेल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि संबंंधित कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
उधर, बाजार में इन दिनों पूजा के लिए देसी घी के नाम से अलग से घी बिक रहा है। कुछ लोग व्रत आदि में इसका सेवन करते हैं। वे यह समझते हैं कि यह पूजा में काम आने वाला शुद्ध घी व्रत में फलाहार के साथ प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन यह खतरनाक है। यह खाने योग्य नहीं है और इसे खाने से नुकसान हो सकता है। सहायक खाद्य आयुक्त डाॅ. मंजुला सिंह ने बताया कि खाने में इसका प्रयोग कतई न करें। इस पर छोटे अक्षरों में लिखा होता है कि यह अखाद्य पदार्थ है। इसलिए इस पर कार्रवाई नहीं हो पाती है, क्योंकि विभाग खाद्य पदार्थों में मिलावट की ही जांच करता है।