मिर्जापुर। विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार को जिला विज्ञान क्लब के तत्वावधान में आयोजित ऑनलाइन कार्यशाला में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव व जल संरक्षण की जानकारी दी गई। इसमें 143 बाल वैज्ञानिकों और विज्ञान संचारकों ने प्रतिभाग किया। सभी को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। जिला समन्वयक सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि वर्तमान में जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण भूमंडलीय ताप है। हिमनदों के पिघलने के कारण विश्व का औसत समुद्री जल स्तर नौ से 88 सेंटीमीटर तक बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञ वैज्ञानिक सीडी राम ने कहा कि समुचित प्रबंधन के अभाव में बरसात का पानी बर्बाद हो जाता है। तालाबों व नहरों की परवाह नहीं की गई। इसलिए किसान सिंचाई के लिए बारिश अथवा भूमिगत जल पर ही आश्रित रह गए हैं। विशेषज्ञ जेएन सिंह ने कहा कि भारत में जल संसाधनों की उपलब्धता क्षेत्रीय जीवन शैली और संस्कृति के साथ जुड़ी है। इसके वितरण में पर्याप्त असमानता भी दिखती है।