मिर्जापुर। हलिया थाना क्षेत्र के एक गांव में आठ वर्ष पहले शौच के लिए गई नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म के मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट संतोष कुमार त्रिपाठी ने आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 35 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड नहीं देने पर एक वर्ष नौ माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। हलिया थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पिता ने सात मार्च 2015 को पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर बताया कि वे खेती करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। विपक्षी सरहंग किस्म के आदमी हैं। जिनका पूरे गांव में आतंक है। उनकी 15 वर्षीय पुुत्री दो मार्च 2015 को शाम सात बजे घर के बगल सिवान में शौच के लिए गई थी। वहां संगम कोल व उसके अन्य साथियों ने उनकी पुत्री का अपहरण कर लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बेटी के नहीं आने पर परिजनों ने खोजबीन की तो पता चला कि उसका अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसकी सूचना हलिया थाने में दी गई, परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस अधीक्षक के आदेश पर 10 मार्च 2015 को मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। विशेष लोक अभियोजक सनातन कुमार ने गवाहों को परीक्षित कराकर साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किया। गवाहों के बयान, पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य और अधिवक्ताओं की दलील के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश और विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट ने आरोपी संजय कोल को 10 वर्ष के कारावास और 35 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की धनराशि बतौर प्रतिकर पीड़िता को प्रदान की जाएगी।