मिर्जापुर। नगर के चेतगंज स्थित इमामबाड़े में रविवार को मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें मौलाना हैदर अब्बास ने हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन एवं औन मोहम्मद के जीवन पर प्रकाश डाला। मौलाना आबिद रजा ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपना जीवन धर्म की रक्षा के लिए न्यौछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि यजीद जब बादशाह हुआ तो वह इस्लाम धर्म के विरूद्घ कार्य करने लगा। वह हजरत मोहम्मद साहब के बताए शरीयत को मानने से इंकार करता था। हजरत इमाम हुसैन मोहम्मद साहब के वारिस थे, यजीद इमाम हुसैन से बैयत करवाना चाहता था, उसने अपने अधिकारियों से उन पर दबाव डालने लगा। इमाम ने बैयत से इंकार कर दिया। इमाम हुसैन इस्लाम की रक्षा करने के लिए अपने पूरे घर वालों के साथ मदीना छोड़कर अपने 72 साथियों के साथ कर्बला पहुंच गए। यजीदी फौज द्वारा इमाम और उनके साथियों का पानी बंद कर दिया गया। इमाम हैसेन ने दस मोहर्रम सन हिजरी को अपने पूरे 72 साथियों की कुर्बानी देकर इस्लाम धर्म को बचा लिया। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत और मोहम्मद एवं शबीहे दुलदुल का जुलूस निकाला गया। जुलूस चेतगंज, बल्ली का अड्डा होतजे हुए इमामबाड़ा कर्बला पहुंचकर समाप्त हुआ। मजलिस की खोजखानी इर्तिजा हुसैन सरवर ने की। पेशखानी मिजराब रिजवी ने किया। जुलूस में शिया समुदाय के लोग उपस्थित रहे।