हलिया। वन विभाग के अधिकारियों और खनन माफिया की मिलीभगत से इलाके के वन क्षेत्रों में अवैध खनन और परिवहन धड़ल्ले से किया जा रहा है। ओवरलोड वाहनों के दौड़ने से इलाके की सड़कें गड्ढे में तब्दील हो गए हैं। विभागीय अधिकारियों की भले ही चांदी कट रही लेकिन सरकार को हर माह लाखों रुपए की चपत लग रही है। खनन माफिया मध्य प्रदेश के हनुमना बार्डर पर बने टोल टैक्स से बचने के लिए जड़कुड़ मार्ग से होते हुए हलिया वन सेंचुरी के रास्ते प्रतिदिन सुरक्षित निकल रहे हैं। प्रतिदिन भारी संख्या में ओवरलोड अवैध बालू, पटिया, गिट्टी व मोरंग लदे वाहन धड़ल्ले से रात दिन गुजर रहे हैं। जबकि मुख्य सड़क पर स्थित हलिया थाना तथा वन विभाग की चौकी भी स्थित है। सैकड़ों की तादात में ओवरलोड ट्रकों के आवागमन से निर्मित सड़कें गड्ढे में तब्दील हो रही हैं। एक तरफ बनाई गई सड़कें ओवरलोड गाड़ियों के कारण क्षतिग्रस्त होती चली जा रही हैं। वन सेंचुरी क्षेत्र से जानवरों को खतरा बना हुआ है। जबकि पुलिस के अधिकारियों तथा वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के कंधे पर अवैध धंधे को रोकने की जिम्मेदारी बनती है। लेकिन मिलीभगत के कारण अवैध धंधा रुकने के बजाए और भी फलता- फूलता चला आ रहा है। रातों दिन अवैध रुप गुजरने वाले वाहनों को कहीं न कहीं पास कराने की इंट्री भी वसूली जा रही है। जो गाड़ियां इंट्री नहीं जमा की है उन्हीं को ही सीज किया जाता है। इतना ही नहीं क्षेत्र में भी अवैध गिट्टी बालू की खदानें जोरों पर चल रही हैं। यदि कैमूर पहाड़ का स्थलीय निरीक्षण किया जाए तो मध्य प्रदेश के वार्डर, उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर वन भूमि ड्रमंडगंज वन रेंज के लोढ़ी, बंजारी, कोढ़वा, बबुरा रघुनाथ सिंह तथा हलिया वन रेंज के गुर्गी, अहुगीखुर्द, हलिया, पहड़ी चक कोटार आदि स्थानों पर अवैध खनन माफियाओं का कारोबार धड़ल्ले से विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से बिना रोक-टोक संचालित किया जा रहा है।