चुनार। तहसील के खतौनी सिस्टम का सर्वर आए दिन फेल होने से काश्तकारो को खतौनी लेने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जमीन की खरीद फरोख्त, बैंक से ऋण लेने व बन्दी व्यक्ति के जमानत व अन्य कार्यो के लिए काश्तकारो को प्राय: ही खतौनी की जरूरत पड़ती रहती है। भूमि खरीदने से पहले खरीददार बेचने वाले काश्तकार से उसके स्वामित्व संबन्धित कागजात की मांग करता है और जमीन बेचने वाला काश्तकार अपने स्वामित्व के बाबत तहसील से मिलने वाले खतौनी को निकालकर खरीददार को दिखाता है। तब खरीददार उसे लेकर तहसील के काम को कराने वाले जानकार लोगों से पूछताछ कर काश्तकार से लिखापढी कराता है। तमाम काश्तकार जो आर्थिक रुप से मजबूत नहीं है और वह बेहतर पैमाने पर कृषि कार्य करने के लिए वह खतौनी के आधार पर बैंकों से ऋण भी लेते हैं और बैंक उन्हें ऋण उनके खतौनी में अंकित भूमि के आधार पर देती है। साथ ही मुकदमें में बंद होकर तहसील कचहरी आने वाले बंदी व्यक्ति को जमानत पर रिहा कराने के लिए प्रतिभू राशि के तौर पर जमानतदार खतौनी को देकर बंदी को रिहा कराते हैं। अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए भी खतौनी की जरूरत पड़ती रहती है। क्षेत्र के काश्तकार अपने जरूरी कामों के लिए खतौनी लेने चुनार तहसील आते हैं लेकिन इधर लगभग एक माह से खतौनी लेने आये किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तहसील चुनार अन्तर्गत मेडिया, बसारतपुर, चौधरीपुर, अदलपुरा, कुशहा, रूदौली, तमाम पट्टी, खानपुर, मगरहा, प्रेमापुर, सोनवर्षा, रैपुरिया, सरैया सिकन्दरपुर, चेराकेपुरा, जमुई, बरेवा, भरेहठा, पिरल्लीपुर, सुकुलपुरा, कदंवा, सेमरा, पौनी, सिरसी, भुडकुडा, रेहिया, बभनी, नुआंव, जमुहार, चिलविलिया, पथरौरा, शेरपुर, भाईपुर बडभुईली खास, लछिमनपुर, मानिकपुर, हाजीपुर, मदहा आदि गांवों सहित कुल 638 गांव के काश्तकार खतौनी लेने के लिए तहसील आते हैं। लेकिन उन्हें खतौनी उपलब्ध नही हो पा रही है। इसको लेकर काश्तकारो का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आये दिन सिस्टम फेल होने से खतौनी लेने आये काश्तकारो को सुबह से शाम तक इतजार करने के बाद उन्हें बैरंग वापस होना पड रहा है। काश्तकार विश्वनाथ सिंह, राकेश कुमार, गनेशू, जावेद अहमद, अब्दुल सलाम राजेश कुमार सिंह, राजनरायन सिंह, अजीत बसन्त सिंह अश्वनी कुमार सिंह आदि काश्तकारो का कहना है कि खतौनी न मिलने के कारण काश्तकार अपने भूमि का क्रय विक्रय व बैंक से ऋण आदि नही ले पा रहा है। और तहसील प्रशासन समस्या के समाधान के प्रति लापरवाह बना हुआ है।