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जीएसटी प्राविधानों पर विस्तार से की गई चर्चा

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मिर्जापुर। राष्ट्रीय स्तर पर गठित नेशनल कमेटी के आहवान पर शनिवार को आयकर-व्यापार कर अधिवक्ता संघ की नगर के तेलियागंज स्थित वाणिज्य कर कार्यालय पर बैठक आयोजित की गई। बैठक में जीएसटी के प्राविधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस मौके पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली को नौ सूत्री मांग-पत्र प्रेषित किया गया। मांग किया गया वर्ष 2018-19 के लिए समाधान योजना का एक मौका और दिया जाए तथा जीएसटी चार में करमुक्त बिक्री का कालम बढ़ाया जाए। आयकर-व्यापारकर अधिवक्ता संघ की तरफ से केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को नौ सूत्री मांग पत्र के माध्यम से कहा गया कि संपूर्ण भारत में नेटवर्क व सर्वर की गंभीर समस्या है। भारतवर्ष में जीएसटी कर प्रणाली तभी सफल होगी, जब डेढ़ करोड़ रुपये तक के वार्षिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों को विवरणी दाखिल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था मैनअली-आनलाइन विधि से किया जाएगा। मांग किया गया कि 30 सितंबर 2018 तक के रिटर्न की देरी में कोई लेट फीस न ली जाए। मांग पत्र के माध्यम से कहा गया कि जीएसटी प्रणाली को धीरे-धीरे सरकार को लागू किया जाना चाहिए था, ताकि लोग इसके अभ्यस्त हो सकें, लेकिन केंद्र की सरकार ने जीएसटी को जल्दबाजी में व्यापारियों पर थोप दिया है। इसलिए अभी अधिनियम के प्राविधानों को लागू किए जाने में शिथिलता बरतनी चाहिए, जिससे कोई गलती न होने पाए। कहा गया कि अभी प्रारंभ में मार्च 2018 तक कर दाताओं के विरूद्घ किसी भी प्रकार की देरी या त्रुटि के लिए कोई भी विधिक कार्रवाई, लेट फीस, ब्याज, पेनाल्टी नहीं की जानी चाहिए। सभी कर दाताओं को 30 जून 2018 तक की पेंडिंग विवरणी को एक और मौका बिना लेट फीस वगैरह के दाखिल करने के लिए दिया जाना उचित एवं आवश्यक है। इस दौरान संघ के अध्यक्ष अधिवक्ता मथुरा प्रसाद मैनी सहित संघ के सभी पदाधिकारी व सदस्यगण मौजूद रहे।
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