मिर्जापुर। माघ पूर्णिमा पर लगे पूर्ण चंद्रग्रहण में विश्व प्रसिद्घ मंदिर विंध्याचल समेत जिले के सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे। ग्रहण की अधिक से अधिक जानकारी के लिए सुबह से ही लोग टीवी से चिपके रहे। लोग ग्रहण के नकारात्मक व सकारात्मक प्रभाव के बारे में ज्योतिषाचार्यों से पूछते रहे। साथ ही दुष्प्रभाव से बचने का उपायों की भी जानकारी ली। गृहणियों ने सूतक आरंभ होने के पूर्व ही खाद्य पदार्थों के पात्रों में गाय का गोबर लगा कर या तुलसी की पत्ती डाल कर ग्रहण के दोषों से बचाने का जतन किया। बुधवार पूरे दिन ग्रहण के बारे में लोग एक दूसरे से चर्चा करते रहे। ग्रहण लगते ही अधिकांश लोगों ने घरों में ही रहना मुनासिब समझा। इस दौरान लोग भगवान का भजन व मंत्रों का जाप करते रहे। ग्रहण काल में गंगा स्नान के महत्व को जानने वालों का नगर के गंगा घाटों पर स्नान के लिए तांता लगा रहा। किसी ने गंगा स्नान किया तो किसी ने मां गंगा के पवित्र जल को शरीर पर छिड़क कर पुण्य प्राप्त किया। चंद्र ग्रहण लगते ही भीख मांगने वाले दान पुण्य करिए बोलते हुए नगर में भ्रमण करते रहे। इस दौरान लोगों ने वस्त्र, अन्न, द्रव्य आदि का दान किया। कुछ लोगों ने अपने छतों पर चढ़ कर मोबाइल से आसमान में घटित हो रहे अद्भुत क्षण को यादगार के रूप में कैद किया। पूर्ण ग्रहण लगते ही आसमान में चमकता चांद नीले छल्ले में बदल गया। पूरा चांद गहरे काले रंग से ढंक गया और उसके चारों ओर नीले रंग की रोशनी बरबस ही लोगों को अपनी ओर खींच रही थी।