मिर्जापुर। महिलाओं द्वारा सदा सुहागन रहने के लिए रखा जाने वाला सोमवती अमावस्या व्रत के अवसर पर सोमवार को महिलाओं ने पूरे विधि विधान से पूजा कर सुहागन रहने का आशीर्वाद मांगा। महिलाएं सुबह से व्रत रह कर पूजा के बाद बरगद का एक सौ आठ बार फेरी करने के बाद पूड़ी और हलवा चढ़ाए गए प्रसाद को ग्रहण कर व्रत तोड़ती हैं। पं. रामलाल त्रिपाठी ने बताया कि महाभारत ग्रंथ में सोमवती अमावस्या के बारे में श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। जिससे प्रभावित होकर उन्होंने व्रत रहने कि इच्छा व्यक्त किया लेकिन उनके पूरे कार्यकाल में सोववती अमावस्या नहीं पड़ने से उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि हिन्दू समाज में विवाह के पूर्व कुछ जातियों में कन्या को धोबिन से सुहाग दिलाने का प्रचलन चला आ रहा है। जिसके संदर्भ में एक कथा प्रचलित है, जिसके अनुसार एक ब्राम्हण की कन्या को ज्योतिषियों ने बताया कि वह विवाहोपरांत विधवा हो जाएगी। ज्योतिषियों की बात से दुखी होकर कन्या की माता-पिता ने इसका उपाय पूछा तो उन्हों ने कहा कि सोमा धोबन अगर इसे सौभाग्य का आशीर्वाद दे दे तो इसका सुहाग बच सकता है और यह रानी बनकर रहेगी। जब इस बात की जानकारी कन्या को हुई तो उसने ब्रम्ह मूहूर्त में प्रतिदिन सोमा धोबन के चबूतरे को लीपपोत कर चली जाती थी। एकदिन सोमा ने उसे पकड़ लिया और उसका कारण पूछा तो कन्या ने अपनी आप-बीती सुनाई। सोमा धोबन ने उसे सुहागन का आशीर्वाद दिया, लेकिन विवाह के बाद उसके पति की सर्पदंश से मौत हो जाने पर वह विधवा हो गई। उसने पति के शव को नदी में बहा दिया। उधर एक राजा को ज्योतिषियों ने बताया कि नदी में एक मुर्दा प्राप्त होगा वही तुम्हारा पुत्र होगा। ज्योतिषियों के कहे अनुसार राजा को वहीं मुर्दा प्राप्त हुआ, जिससे वह जीवित हो उठा। राजा ने उसे अपना पुत्र मान कर राजकुुुमार बना दिया। कुछ दिनों बाद जब उसके विवाह की तैयारी के पूर्व ही उसे सारी बातें याद आ गई। उसने राजा को पूरी बात बताई राजा ने कन्या की खोजकर उसी से उसका विवाह करा दिया। इस तरह ज्योतिषियों की दोनों बातें सत्य हुई। कन्या विधवा भी हुई और रानी भी बनी। तभी से महिलाएं सुहागन के लिए सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या पर व्रत रहने लगी जिसे सोमवती अमावस्या व्रत कहा जाता है।