जमालपुर। क्षेत्र के बहुआर गांव के रविंद्रालय में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन मंगलवार को कथा वाचकों ने हनुमान जी कि कथा तथा राम वनगमन कथा का रसपान कराया। कथा का श्रवण करने के लिए श्रोताओं की भीड़ जुुटी रही। कथावाचिका पं. विजय लक्ष्मी शास्त्री जी ने कहा कि हनुमान श्रीरामचंद्र के सच्चे भक्त थे। श्रीराम हनुमान की भक्ति से प्रभावित होकर स्वयं उनके के बस में रहते थे, जिसका जिक्र गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में किया है। कथावाचिका ने कहा सुमरि पवन सुत पावन नामू, अपने बस करि राखै रामू... इस चौपाई से सिद्ध होता है कि हनुमान जी ने अपनी भक्ति के बल पर श्रीराम को अपने हृदय में रखते थे। हनुमान जी ने अपने स्वामी प्रभु श्रीराम को खुश करने के लिये पूरे शरीर में सिंदूर का लेप भी कर लिया था। इसी क्रम में कथावाचक राम कृष्ण त्रिपाठी ने राम के वनगमन प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जिस देश और कुल से ज्ञान-भक्ति दूर हो जाए, उस पर विपत्ति कि काली छाया पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम रूपी ज्ञान भक्ति रूपी सीता अयोध्या से दूर हो गई तो अयोध्या जैसे राज्य मे मुसीबतों और विपत्तियों का अंबार सा लग गया। उन्होंने कहा कि विपत्तियों जैसे मर्ज का इलाज मात्र संतो का हाथों में होता है, वहीं भरत जैसे संत और गुरू वशिष्ठ जैसे परम ज्ञानी व्यक्ति ही अयोध्या और अयोध्या वासियों को मुसीबतों से निकालने का प्रयास किया, फिर भी ज्ञान और भक्ति अयोध्या से दूर होने पर पूरी अयोध्या नगरी शोकाकुल रही। इस दौरान व्यवस्थापक रवि प्रकाश त्रिपाठी चिंतामणि श्रीवास्तव, अवधेश सिंह, बिजेंद्र सिंह, शमशेर यादव, सुशील यादव, वीरेंद्र पांडेय, अरुण प्रकाश त्रिपाठी, चंद्रकांता पांडेय, दीपक गुप्ता, संजय चौरसिया आदि रहे।