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संत नीरजानंद शास्त्री ने बहाई भक्ति रस की फुहार

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जमालपुर। क्षेत्र के खिरौडी गांव के हनुमान मंदिर परिसर में चल रहे नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के चौथे दिन प्रवचन का श्रवण करने भक्तों की भीड़ जुटी रही। कथावाचक संतनीरजानंद शास्त्री जी ने अपनी ओजस्वी वाणी से नर-नारियों को श्रीराम कथा कर रसास्वादन कराया। उन्होंने सीता स्वयंवर की कथा सुनाकर उपस्थित भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीतमय श्रीराम कथा के बीच-बीच में भक्तों द्वारा किए जा रहे प्रभु श्रीरामचंद्र जी के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो रहा था। संगीतमय श्रीराम कथा के दौरान कथावाचक संत नीरजानंद शास्त्री जी ने कहा कि श्रीराम प्रेम की साक्षात प्रतिमूर्ति है और सीता जी लक्ष्मी की साक्षात प्रतिमूर्ति है। कथावाचक ने कहा कि सीता स्वयंवर मे गुरु विश्वामित्र जी ने राम और लक्ष्मण के साथ जनकपुरी पहुंच गए। श्रीराम ज्ञान की और लक्ष्मण वैराग्य की प्रतिमूर्ति है एवं सीता जी भक्ति की प्रतिमूर्ति है। कहा कि सीता स्वयंवर मे सीता से विवाह की इच्छा से कई देशों के राजा आए हुए थे। बडे-बडे राजा जब धनुष को उठा नहीं सके, तब जनक जी की आंखों में आंसू आ गया। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से जब श्रीरामचंद्र जी ने धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढाना शुरू किया तो धनुष बीच से ही टूट गई। स्वयंवर सभा में खुशियां छा गयी और फूलों की वर्षा होने लगी। कथावाचक ने कहा कि कलयुग में श्रीराम का नाम मात्र लेने से मनुष्य का उद्धार हो जाता है। रामकथा मनुष्य को परमात्मा के करीब ले जाती है और सच्चे मन से कथा श्रवण करने पर प्राणी का कल्याण होता है। श्रीराम कथा के दौश्रान कथा के आयोजक ज्ञान सिंह, सारनाथ त्रिपाठी, संतोष तिवारी, विजय सिंह, नवीन पांडेय, राणा प्रताप सिंह, गोपाल पांडेय, श्याम बाबू सिंह, विमलेश त्रिपाठी, बालजी पांडेय, जगदीश राय, पप्पू तिवारी, रामचंदर पांडेय सहित तमाम भक्तजन मौजूद रहे।
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