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भागवत पूजन व चिंतन से चरित्र और विवेक का विकास: नरायणानंद

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लालगंज। क्षेत्र के गंगहरा स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन बुधवार को किया गया। रामकथा शुरू होने के पूर्व भक्तों द्वारा कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा गांव की गलियों से होकर कथा स्थल तक पहुंचे। कथाकार काशी धर्म पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ महराज ने कथा का शुभारंभ कर कहा कि मानव समाज की संपूर्ण मनोवृत्तियों का ज्ञान भागवत में भरा है। इस ग्रंथ के पूजन व चिंतन करने से चरित्र और विवेक का विकास होता है।उन्होंने कहा कि धर्म के बिना मनुष्य यंत्र के समान है। कहा कि प्रकृति और मनोवृत्ति का ज्ञान होने से विवेक क्रियाशील रहता है। ऐसे वातावरण में धर्म वैज्ञानिक व रूढ़ियों से मुक्त रहता है। व्यक्ति स्वतंत्र होकर आत्मविश्वास से भरा रहता है।कहा कि इच्छा और ज्ञान सहचर हैं। भागवत कथा में अच्छाई का ज्ञान दर्पण की तरह दिखाई देता है, लेकिन बुराई अदृश्य और कपट रूप धारण करके नुकसान पहुंचाने का कार्य करती है। कहा कि अहंकार में समस्त दुर्गुण रहते हैं, इसलिए भागवत में मानव को परमात्मा का अंश बताया गया है। इस अवसर पर उमाशंकर मिश्र, पूर्व प्रधान शिव बहाल दूबे, ग्राम प्रधान अमरेश दूबे, त्रिलोकी नाथ, प्रभाशंकर, रविशंकर, जगत नारायण दूबे आदि ने कथा श्रवण किया। भागवत कथा के अंत में भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया।
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