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ॐजो टूटकर भी दो दिलों को जोड़ देते हैं ॐ

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हलिया। बुढ़वा मंगल पर्व के अवसर पर देवहट बाजार स्थित रामलीला मैदान में मंगलवार की शाम वैश्य एकता मंच के तत्वावधान में होली मिलन समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें पहुंचे भारी संख्या में वैश्य समाज के लोगों ने जमकर एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर सामाजिक एकता का संकल्प लिया। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में छंदमयी स्वर लहरियों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहें। साहित्यिक संस्था कविता गांव में के बैनर तले आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ वाराणसी की कवयित्री विभा सिंह के काव्य पाठ से हुआ। वीणा वाली जननी भवानी मां, द्वार तेरे बेटी आई है। बंधु पाल हास्य व्यंग्य- झुक कर करै सलामी सबही, गांव में ऊंची शान हो गईल। जौनपुर से आए ओमप्रकाश यादव ने देशवा हमार हउवे स्वर्ण क कोना, नाही टोना लागै राम। अवधेश सिंह दास ने, कभी भी जुल्म की टहनी न फूली है न फलती है। उमेश चंद्र द्विवेदी दीन ने बोले कोयल सबेर बगियन में, लागै बोलिया बुतल जहर लागै सुरेंद्र मिश्र अंकुर ने कहि देब त लागी जाई धक से सुनाकर खूब वाहवाही लूटा ।मनोज द्विवेदी मधुर ने फूल भंवरा बसंत फागुन में, दूर होखै न कंत फागुन में ।साहिल मीरजापुरी ने-जो बनने वाली थी कलियां वतन की जीनतो नाज। विभा सिंह ने- निभाना प्यार तो सीखो गुलाब फूलों से, जो टूटकर भी दो दिलों को जोड़ देते हैं। आशीष तिवारी निर्मल ने कर्म अच्छे हो तो स्वर्ग मिलता है, बुरे कर्मों से नर्क होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान लवकुश केशरी एवं संचालन ओज कवि प्रकाश मिर्जापुरी ने किया। कवियों का स्वागत आयोजक अध्यक्ष तारकेश्वर केशरी ने एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य श्रीश कुमार द्विवेदी ने किया। इस दौरान कैलाश केशरी, संजीव केशरी, पिंटू केशरी, सजन सिंह, विकास केशरी, राजेश कुमार सिंह, विवेक कुमार सिंह, जय प्रकाश केशरी, विपुल सिंह, धीरज केशरी, कौशलेंद्र गुप्ता, सुरेश केशरी शशांक केशरी, प्रवीण केशरी सहित बड़ी संख्या में काव्य प्रेमी उपस्थित रहे।
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